FAQ
अट्टहास शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ ओष्ठ — होंठ — गिरा। प्रचलित परंपरा इसे अधर ओष्ठ, यानी नीचे का होंठ बताती है। यहाँ की शक्ति फुल्लरा और भैरव विश्वेश कहलाते हैं।
अट्टहास का अर्थ है ठहाका, ज़ोर की हँसी। जो अंग यहाँ गिरा वह होंठ है, जिससे हँसी निकलती है, और देवी का नाम फुल्लरा है जिसका अर्थ है खिली हुई। नाम, अंग और देवी तीनों एक ही भाव पर आ मिलते हैं।
फुल्लरा का अर्थ है खिली हुई — फूल की तरह खुली हुई। इसे फुलोरा भी कहा जाता है।
नहीं। गर्भगृह में प्रतिमा के स्थान पर एक बड़ी शिला पूजित है। इक्यावन में यह अकेला ऐसा स्थान नहीं — कामाख्या, ज्वालामुखी और प्रयाग के अलोपी मंदिर में भी प्रतिमा नहीं है।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में, लाभपुर के निकट। विद्वान डी. सी. सरकार की अनुक्रमणिका भी यही स्थान बताती है और इस पर कोई मतभेद नहीं है।
हाँ। अट्टहास उन आठ नामों में है जो पीठनिर्णय की कुछ प्रतियों में नहीं मिलते। डी. सी. सरकार का अनुमान है कि ये अंतिम आठ बाद का जोड़ हो सकते हैं, और बंगाल में बावन पीठों की जो मान्यता चलती है वह इसी उलझन से बनी। इससे इस स्थान की मान्यता कम नहीं होती — यहाँ पूजा सदियों से होती आई है — पर पाठ का इतिहास जैसा है वैसा बताना उचित है।
