FAQ
त्रिपुरा शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ दक्षिण-पाद — दाहिना चरण — गिरा। यहाँ की शक्ति त्रिपुरा (त्रिपुरसुंदरी) और भैरव त्रिपुरेश कहलाते हैं। कुछ प्रतियों में भैरव के लिए त्रिपुराक्ष और नल नाम भी मिलते हैं।
पीठ, देवी, भैरव और राज्य — चारों का नाम "त्रिपुर" से बना है। इक्यावन में यह अकेला ऐसा पीठ है जिसके नाम पर आज एक पूरा राज्य जाना जाता है।
त्रिपुरा के उदयपुर में, जो राज्य की पुरानी राजधानी रही है। विद्वान डी. सी. सरकार अपनी अनुक्रमणिका में उदयपुर और रंगामाटी दोनों का उल्लेख करते हैं।
वे दस महाविद्याओं में गिनी जाती हैं, और श्रीविद्या की पूरी उपासना-पद्धति उन्हीं से जुड़ी है। यह नाम केवल एक स्थानीय देवी का नहीं — वह पूरी शाक्त साधना का एक केंद्र है।
इस मंदिर का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं मिला जिससे दर्शन समय सत्यापित किए जा सकें, और बिना पुष्टि के समय छापना इस संग्रह के नियम के विरुद्ध है।
