FAQ
कामगिरि शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ माता सती की महामुद्रा (योनि) गिरी थी। इसी कारण यहाँ की शक्ति कामाख्या और भैरव उमानंद कहलाते हैं।
गर्भगृह में प्रतिमा के स्थान पर पत्थर की एक ढलवाँ शिला है, जो दोनों ओर से उतरकर बीच में लगभग दस इंच गहरी योनि-रूप दरार बनाती है। उसमें नीचे बहते एक अनवरत सोते का जल सदा भरा रहता है, और पूजा उसी की होती है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंदिर भक्तों के लिए सुबह 8:00 बजे खुलता है, दोपहर 1:00 से 2:30 तक भोग हेतु बंद रहता है, और रात्रि के लिए द्वार सायं 5:15 पर बंद होते हैं। देवी की आरती 7:30 बजे होती है। यह जानकारी 31 जुलाई 2026 को सत्यापित है — यात्रा से पूर्व मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि अवश्य करें।
अंबुबाची में यह माना जाता है कि देवी रजस्वला हैं। इन दिनों गर्भगृह तीन दिन पूर्णतः बंद रहता है और चौथे दिन अनुष्ठानों के बाद कपाट खुलते हैं, जिस पर बड़ा उत्सव होता है। 2026 में मंदिर 23 से 25 जून तक बंद रहा और 26 जून को पुनः खुला। तिथियाँ हर वर्ष बदलती हैं।
लिखित रूप में सबसे पुराना उल्लेख नवीं शताब्दी के तेजपुर ताम्रपत्रों में मिलता है। पुरातात्विक अवशेषों से किसी और पुरानी संरचना का अनुमान लगाया जाता है, पर वह अनुमान ही है। वर्तमान मंदिर 1565 में कोच राजा नरनारायण के काल में बना, क्योंकि 1498 के आक्रमण में पुराना मंदिर ध्वस्त हो गया था।
हाँ। अष्टादश शक्ति पीठ स्तोत्र में इसे "कामरूपा" कहा गया है। यह उन कुछ स्थानों में है जहाँ अष्टादश की परंपरा और पीठनिर्णय के इक्यावन — दोनों एक ही स्थान बताते हैं। ध्यान रहे कि ये दो अलग परंपराएँ हैं, एक दूसरे का उपसमुच्चय नहीं।
हाँ, ₹501 का विशेष दर्शन टिकट आधिकारिक पोर्टल www.mkdonline.co.in से बुक किया जा सकता है। अत्यधिक भीड़ के दिनों में यह सुविधा स्थगित रहती है, इसलिए यात्रा से पूर्व उपलब्धता देख लेना उचित है।
