मिथिला शक्ति पीठ

mithilā

सीता की जन्मभूमि मानी जाने वाली मिथिला का वह पीठ, जहाँ सती का बायाँ स्कन्ध गिरा।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
वाम-स्कन्ध
शक्ति
उमा
भैरव
महोदर

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

मिथिला का नाम सुनते ही जो पहली बात मन में आती है वह सीता है। परंपरा इसी भूमि को उनकी जन्मभूमि मानती है, और जनकपुर आज भी उसी स्मृति से जाना जाता है।

पीठनिर्णय इसी मिथिला को इक्यावन में गिनता है। यहाँ वाम-स्कन्ध गिरा — बायाँ कंधा। देवी उमा कहलाईं, भैरव महोदर। शिवचरित देवी को महादेवी कहता है।

एक भूमि पर दो स्त्रियों की स्मृति एक साथ बैठी है — सीता, जो यहाँ जन्मीं, और सती, जिनका एक अंश यहाँ गिरा। दोनों की कथाएँ अलग हैं, पर दोनों में एक बात साझा है: दोनों ने अपमान के उत्तर में स्वयं को समेट लिया, प्रतिशोध नहीं चुना।

स्कन्ध — कंधा — वह अंग है जिस पर भार उठाया जाता है। जिस भूमि की सबसे प्रसिद्ध पुत्री ने जीवन भर भार ही उठाया, वहाँ इसी अंग का गिरना एक ऐसी संगति है जिस पर रुका जा सकता है।

मंदिर नेपाल की तराई में है, जनकपुर में — भारत की सीमा से थोड़ी ही दूर।

  • वही मिथिला, जिसे परंपरा सीता की जन्मभूमि मानती है।
  • अंग वाम-स्कन्ध — बायाँ कंधा, जिस पर भार उठाया जाता है।
  • देवी उमा; शिवचरित उन्हें महादेवी कहता है।
  • S0 की उन तेरह पंक्तियों में, जिनसे इस संग्रह का extraction स्वतंत्र रूप से जाँचा गया।

कथा

इस भूमि पर दो कथाएँ मिलती हैं — एक जो सबको याद है, और एक जो इस सूची में दर्ज है।

सती का वाम स्कन्ध

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि मिथिला में वाम-स्कन्ध गिरा — बायाँ कंधा। देवी उमा हुईं, भैरव महोदर।

दो स्त्रियों की भूमि

मिथिला को परंपरा सीता की जन्मभूमि मानती है, और जनकपुर आज भी उसी स्मृति से जाना जाता है।

तो इस एक भूमि पर दो स्त्रियों की स्मृति साथ-साथ बैठी है — सीता, जो यहाँ जन्मीं, और सती, जिनका एक अंश यहाँ गिरा।

दोनों की कथाएँ अलग हैं। पर एक बात साझा है: दोनों ने अपमान के उत्तर में स्वयं को समेट लिया — सती ने देह त्यागी, सीता धरती में समा गईं। किसी ने प्रतिशोध नहीं चुना।

कंधे का अर्थ

स्कन्ध वह अंग है जिस पर भार उठाया जाता है।

जिस भूमि की सबसे प्रसिद्ध पुत्री ने जीवन भर भार ही उठाया — वनवास, अग्निपरीक्षा, फिर त्याग — वहाँ इसी अंग का गिरना एक ऐसी संगति है जिस पर रुका जा सकता है।

इस सूची में ऐसी संगतियाँ बार-बार मिलती हैं, और वे किसी ने जोड़ी हुई नहीं लगतीं। शायद यही कारण है कि ये स्थान सदियों तक याद रखे गए।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण)

आज यह स्थान कहाँ है

जनकपुर, तराई, नेपाल

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas — "modern Janakpur in the Nepalese Tarai"

यात्रा सुझाव

प्रमुख पर्व: नवरात्रि · विवाह पंचमी

मिथिला शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न