मानस शक्ति पीठ

mānasa

इक्यावन में वह पीठ जो कोई मंदिर नहीं — कैलास के पास फैला एक सरोवर है।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
दक्षिण-हस्त
शक्ति
दाक्षायणी
भैरव
हर

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

इक्यावन की सूची में अधिकांश पीठ मंदिर हैं, या कम-से-कम कोई ऐसा स्थान जहाँ भवन खड़ा है। मानस उनमें नहीं है।

यहाँ जो है वह एक सरोवर है — मानसरोवर, कैलास के निकट, तिब्बत की ऊँचाई पर। न गर्भगृह, न शिखर, न द्वार।

पीठनिर्णय कहता है कि यहाँ दक्षिण-हस्त गिरा — दाहिना हाथ। देवी दाक्षायणी कहलाईं, जो सती का ही एक नाम है — दक्ष की पुत्री। भैरव हर हैं, यद्यपि हरि और अमर नाम भी दर्ज हैं।

देवी का नाम यहाँ विशेष है। बाक़ी पचास स्थानों पर देवी को कोई नया नाम मिला — कामाख्या, विशालाक्षी, फुल्लरा, नंदिनी। यहाँ वे दाक्षायणी हैं, यानी वही नाम जो देह त्यागने से पहले उनका था।

जिस पिता के यज्ञ से यह पूरी कथा शुरू हुई, उसी पिता के नाम से बना नाम इस एक स्थान पर रह गया। सूची में यह अकेला ऐसा बिंदु है जहाँ कथा अपने आरंभ की ओर लौटकर देखती है।

⚠️ यह भी ध्यान रहे कि दाहिना हस्त यहाँ आता है — काश्मीर पर नहीं, यद्यपि प्रचलित मान्यता शारदा पीठ को दाहिने हाथ से जोड़ती है।

  • इक्यावन में यह मंदिर नहीं, एक सरोवर है — कैलास के निकट, तिब्बत में।
  • देवी का नाम दाक्षायणी — वही नाम जो देह त्यागने से पहले सती का था।
  • दाहिना हस्त पीठनिर्णय में यहाँ आता है, काश्मीर पर नहीं।
  • भैरव के नाम पर तीन पाठ — हर, हरि तथा अमर।

कथा

यहाँ की कथा में एक बात लौटकर आती है — देवी का वही नाम, जो सब शुरू होने से पहले था।

सती का दाहिना हस्त

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि मानस में दक्षिण-हस्त गिरा — दाहिना हाथ। देवी दाक्षायणी हुईं, भैरव हर।

वह नाम जो लौट आया

बाक़ी पचास स्थानों पर देवी को कोई नया नाम मिला — कहीं कामाख्या, कहीं विशालाक्षी, कहीं फुल्लरा, कहीं नंदिनी। हर पीठ पर एक नई पहचान।

यहाँ ऐसा नहीं हुआ। यहाँ वे दाक्षायणी हैं — दक्ष की पुत्री। वही नाम जो देह त्यागने से पहले उनका था।

जिस पिता के यज्ञ से यह पूरी कथा शुरू हुई, उसी पिता के नाम से बना नाम इस एक स्थान पर रह गया। पूरी सूची में यह अकेला बिंदु है जहाँ कथा अपने आरंभ की ओर लौटकर देखती है।

बिना मंदिर का तीर्थ

यहाँ कोई भवन नहीं है। जो है वह मानसरोवर है — कैलास के पास फैला एक सरोवर, तिब्बत की ऊँचाई पर।

इक्यावन में कुछ और स्थान भी हैं जहाँ प्रतिमा नहीं मिलती — कामाख्या में शिला की दरार, ज्वालामुखी में ज्वालाएँ, अट्टहास में एक बड़ी शिला, प्रयाग के अलोपी मंदिर में काठ की डोली। पर यहाँ तो मंदिर ही नहीं है।

परंपरा ने एक झील को उसी सूची में रख दिया जिसमें बाक़ी पचास तीर्थ हैं। शायद यह मान लिया गया कि पवित्रता को दीवारों की ज़रूरत नहीं होती।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण)

आज यह स्थान कहाँ है

मानसरोवर, कैलास के निकट, तिब्बत, चीन

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas (Manasasarovara)

आसपास के दर्शनीय स्थल

  • काश्मीर (शारदा पीठ) — अंग पर भ्रम — प्रचलित मान्यता शारदा पीठ को सती के दाहिने हाथ से जोड़ती है, पर पीठनिर्णय में दाहिना हस्त इसी पीठ का है। दोनों पृष्ठ यह अंतर दर्ज करते हैं।

मानस शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न