FAQ
जयंती शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ वाम-जंघा — बाईं जाँघ — गिरी। यहाँ की शक्ति जयंती और भैरव क्रमदीश्वर कहलाते हैं।
इस पर दो दावे हैं। विद्वान डी. सी. सरकार अपनी अनुक्रमणिका में इसे सिलहट ज़िले (आज बांग्लादेश) में रखते हैं। प्रचलित सूचियाँ इसे मेघालय के जयंतिया हिल्स में नारतियांग का जयंती दुर्गा मंदिर बताती हैं। दोनों दावे इस पृष्ठ पर स्रोत सहित दिए गए हैं।
क्योंकि जयंतिया राज्य कभी सिलहट के मैदानों और जयंतिया की पहाड़ियों — दोनों पर फैला था। एक ही नाम दोनों भूभागों को समेटे हुए था। 1947 में वह क्षेत्र दो देशों में बँट गया, और उसी के साथ यह पीठ भी दो दावों में बँट गया।
हाँ। जालंधर भी मूलतः एक क्षेत्र का नाम था, नगर का नहीं — और वहाँ भी पहचान दो जगह बँटी हुई है। तीर्थ-सूचियाँ उस भूगोल पर टिकी हैं जो बदलता रहता है; नाम वहीं रह जाते हैं, सीमाएँ खिसक जाती हैं।
जब यही निश्चित नहीं कि यह पीठ किस देश में है, तब किसी एक मंदिर के दर्शन समय छाप देना पाठक को भ्रमित करना होगा।
