FAQ
मणिवेद शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ मणिबंध — कलाई — गिरी। यहाँ की शक्ति गायत्री और भैरव सर्वानंद कहलाते हैं।
विद्वान डी. सी. सरकार अपनी एक पाद-टिप्पणी में यही लिखते हैं — कि "मणिबंध" एक भ्रमित पाठ से बना नाम है। उसी टिप्पणी में वे बताते हैं कि मगध और कर्णाट नाम बाद के संशोधकों ने जोड़े, क्योंकि उन्हें सामने के पाठ से इक्यावन नाम बन ही नहीं रहे थे।
क्योंकि इस संग्रह की रीढ़ पीठनिर्णय का पाठ है, और उस पाठ में यह नाम है। जो पाठ में है वह दिखाया गया है, और साथ में यह भी कि विद्वान उसके बारे में क्या कहते हैं। छिपाना विकल्प नहीं था।
यह तय नहीं है। सरकार "संभवतः मणिपुर" कहते हैं। प्रचलित सूचियाँ इसे पुष्कर के पास मणिबंध से जोड़ती हैं, और वहाँ देवी गायत्री तथा भैरव सर्वानंद के नाम मेल भी खाते हैं। पर नाम पर ही संदेह होने से पूरा प्रश्न खुला रह जाता है।
नहीं। यह केवल दिखाता है कि ये सूचियाँ आकाश से नहीं उतरीं — इन्हें मनुष्यों ने लिखा, सुना और नक़ल किया, और जहाँ मनुष्य हैं वहाँ चूक भी है। पीठों की परंपरा बहुत पुरानी है; प्रश्न केवल इस एक नाम पर है।
