FAQ
विराट शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ पादांगुलि — पैर की उँगलियाँ — गिरीं। यहाँ की शक्ति अंबिका और भैरव अमृत (अमृताक्ष) कहलाते हैं।
यह तय नहीं है। विद्वान डी. सी. सरकार दो बातें कहते हैं — प्राचीन विराट देश जयपुर-अलवर-भरतपुर के क्षेत्र में था, पर परवर्ती मध्यकालीन लेखकों ने इसी नाम का एक और देश उत्तरी बंगाल में रखा। दोनों दावे "देश" के स्तर पर हैं, किसी मंदिर के नहीं।
राजस्थान वाला दावा उसी विराट नगर की ओर जाता है, जहाँ महाभारत के अनुसार पांडवों ने अपना अज्ञातवास का वर्ष बिताया था। पर यह पहचान निश्चित नहीं है।
एक बात ध्यान देने योग्य है। सूची का पहला नाम हिंगुला है, जहाँ ब्रह्मरन्ध्र गिरा — सिर के ऊपर का बिंदु। और अंतिम नाम विराट है, जहाँ पैर की उँगलियाँ। सिर से पैर तक — इक्यावन नामों का यह क्रम अपने भीतर एक पूरी देह समेट लेता है।
हाँ। विराट उन आठ नामों में अंतिम है जो पीठनिर्णय की कुछ प्रतियों में नहीं मिलते, और जिनके कारण बंगाल में बावन पीठों की मान्यता बनी।
