FAQ
कुरुक्षेत्र शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ दक्षिण-गुल्फ — दाहिना टखना — गिरा। यहाँ की शक्ति सावित्री और भैरव स्थाणु कहलाते हैं। शिवचरित में देवी के लिए सांवरी व विमला तथा भैरव के लिए संवर्त नाम मिलते हैं।
स्थाणु का अर्थ है जो अचल है, जो हिलता नहीं — ठूँठ की तरह स्थिर। यह नाम इस भूमि पर विशेष अर्थ रखता है, क्योंकि कुरुक्षेत्र वह जगह है जहाँ अठारह दिनों में एक पूरा युग हिल गया था।
सावित्री वह हैं जो यम के पीछे चलती रहीं और अपने पति को मृत्यु से वापस माँग लाईं — भारतीय परंपरा में यह नाम हार न मानने का पर्याय है। एक रणभूमि पर, जहाँ हज़ारों मृत्यु में गए, इस नाम का होना उल्लेखनीय है।
हरियाणा में, थानेसर के निकट। विद्वान डी. सी. सरकार की अनुक्रमणिका भी यही स्थान बताती है और इस पर कोई मतभेद नहीं है।
इस पीठ का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं मिला जिससे दर्शन समय सत्यापित किए जा सकें, और बिना पुष्टि के समय छापना इस संग्रह के नियम के विरुद्ध है।
