FAQ
कन्याश्रम शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ पृष्ठ — शरीर का पिछला भाग — गिरा। यहाँ की शक्ति सर्वाणी और भैरव निमिष कहलाते हैं। कुछ प्रतियों में अंग दृष्टि भी लिखा मिलता है।
प्रचलित सूचियाँ लगभग सर्वसम्मति से ऐसा कहती हैं। पर विद्वान डी. सी. सरकार अपनी अनुक्रमणिका में इसे "पूर्वी भारत में" रखते हैं — चटगाँव ज़िले में, कुमीरा रेलवे स्टेशन के पास कुमारीकुंड नामक स्थान पर। दोनों दावों के बीच लगभग दो हज़ार किलोमीटर की दूरी है।
भ्रम का कारण शायद नामों में है। पीठ का नाम कन्याश्रम है, दक्षिण वाला स्थान कन्याकुमारी है, और सरकार जिस स्थान की बात करते हैं उसका नाम कुमारीकुंड है। तीनों में एक ही शब्द है — कन्या, कुमारी। सदियों की नक़ल और संकलन में कहीं एक नाम दूसरे पर बैठ गया।
कोई एक नहीं। इस संग्रह में यह तय करने वाली परत (कौन सा पीठ है — अंग, देवी, भैरव) और पहचानने वाली परत (आज वह कहाँ है) अलग-अलग रखी गई हैं। पहली अटल है, दूसरी में दोनों दावे स्रोत सहित दिए गए हैं।
जब यही निश्चित नहीं कि यह पीठ किस देश में है, तब किसी एक मंदिर के दर्शन समय छाप देना पाठक को भ्रमित करना होगा।
