FAQ
युगाद्या शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ दक्षिण-पादांगुष्ठ — दाहिने पैर का अंगूठा — गिरा। यहाँ की शक्ति युगाद्या और भैरव क्षीरकंठ कहलाते हैं। प्रचलित परंपरा भी यही अंग बताती है।
क्षीर का अर्थ है दूध और ग्राम का गाँव; बोलचाल में यह खीरग्राम हो गया। यहाँ के भैरव का नाम भी क्षीरकंठ है, यानी दूध-कंठ — स्थान और देवता एक ही शब्द से बँधे हैं। यह नाम कहाँ से आया, इसका कोई प्रमाणित विवरण नहीं मिला, इसलिए यहाँ कोई कथा नहीं जोड़ी गई।
दोनों चलते हैं। युगाद्या का अर्थ है युग की आदि। बांग्ला उच्चारण में यह योगाद्या और फिर जोगाद्या हो जाता है, और स्थानीय लोग उन्हें इसी नाम से जानते हैं। पीठनिर्णय की प्रतियों में भी दोनों वर्तनियाँ मिलती हैं।
पीठनिर्णय और प्रचलित परंपरा दोनों दाहिने पैर का अंगूठा कहते हैं। पर चंडीमंगल नामक ग्रंथ में एक पाठभेद मिलता है, जहाँ अंग पृष्ठ बताया गया है। इस संग्रह में पीठनिर्णय वाला पाठ मुख्य रखा गया है।
पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्दवान ज़िले में, कटवा के पास क्षीरग्राम (खीरग्राम) में। विद्वान डी. सी. सरकार की अनुक्रमणिका भी यही स्थान बताती है।
