FAQ
वक्रेश्वर शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ मनस् — मन — गिरा। यह इक्यावन में अकेला ऐसा पीठ है जहाँ जो गिरा वह शरीर का कोई अंग नहीं है। प्रचलित परंपरा इसे कभी "मन" कहती है और कभी "भ्रूमध्य", दोनों भौंहों के बीच का वह बिंदु जिसे मन का स्थान माना जाता रहा है।
पीठनिर्णय के अनुसार देवी महिषमर्दिनी और भैरव वक्रनाथ। ध्यान रहे कि शिवचरित नामक दूसरा ग्रंथ यहाँ देवी का नाम वक्रेश्वरी लिखता है और अंग दक्षिण-बाहु बताता है — यह अंतर इस पृष्ठ पर दर्ज है।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में, दुबराजपुर के निकट। विद्वान डी. सी. सरकार की अनुक्रमणिका भी यही स्थान बताती है और इस पर कोई मतभेद नहीं है।
मंदिर के पास आठ प्राकृतिक उष्ण जलधाराएँ हैं, हर एक अलग तापमान की। इनमें अग्निकुंड सबसे गर्म बताया जाता है — द्वितीयक विवरणों के अनुसार लगभग 93 डिग्री सेल्सियस। जल को औषधीय गुणों वाला माना जाता है।
इस मंदिर का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं मिला जिससे दर्शन समय सत्यापित किए जा सकें, और बिना पुष्टि के समय छापना इस संग्रह के नियम के विरुद्ध है।
