गंडकी शक्ति पीठ

gaṇḍakī

वह पीठ जिसका नाम एक नदी का है — और जिसका ठीक स्थान आज तक तय नहीं।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
गण्ड
शक्ति
गंडकी
भैरव
चक्रपाणि

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

इक्यावन में तीन पीठ ऐसे हैं जिनके नाम नदियों पर हैं — करतोयातट, सुगंधा और गंडकी। पर इन तीनों में गंडकी सबसे अनिश्चित है।

कारण सीधा है। विद्वान डी. सी. सरकार इस पीठ के लिए किसी मंदिर या गाँव का नाम नहीं देते। वे केवल इतना बताते हैं कि गंडकी गंगा की सहायक नदी है और बख़्तियारपुर के पास उससे मिलती है — यानी वे नदी का भूगोल बताते हैं, पीठ का पता नहीं।

एक नदी सैकड़ों किलोमीटर लंबी होती है। वह नेपाल के हिमालय से निकलकर बिहार के मैदानों तक आती है। "गंडकी" कहने से यह तय नहीं होता कि पीठ उस धारा के किस बिंदु पर है।

पीठनिर्णय यहाँ गण्ड बताता है — कपोल, गाल। देवी गंडकी कहलाईं, भैरव चक्रपाणि। कुछ प्रतियों में देवी का नाम चण्डी भी मिलता है।

प्रचलित सूचियाँ इसे नेपाल के मुक्तिनाथ से जोड़ती हैं, जो गंडकी की ऊपरी धारा पर है। पर वहाँ अंग शीश बताया जाता है — जो पीठनिर्णय से मेल नहीं खाता।

इसलिए यहाँ कोई एक स्थान नहीं चुना गया। जब स्रोत स्वयं केवल एक नदी का नाम देता हो, तो उसे किसी एक मंदिर पर टिका देना पाठक को गुमराह करना होगा।

  • सरकार इस पीठ के लिए कोई मंदिर या गाँव नहीं बताते — केवल नदी का भूगोल।
  • गंडकी नेपाल के हिमालय से बिहार के मैदानों तक बहती है; "गंडकी" से स्थान तय नहीं होता।
  • प्रचलित सूचियाँ इसे मुक्तिनाथ (नेपाल) से जोड़ती हैं, पर वहाँ अंग शीश बताया जाता है।
  • करतोयातट व सुगंधा की तरह यह भी नदी के नाम पर बना पीठ है।

कथा

यहाँ की कठिनाई कथा की नहीं — यह है कि एक नदी के नाम से कोई स्थान कैसे तय हो।

सती का गण्ड

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि गंडकी में गण्ड गिरा — कपोल, गाल। देवी गंडकी हुईं, भैरव चक्रपाणि। कुछ प्रतियों में देवी का नाम चण्डी भी मिलता है।

नदी का नाम, पता नहीं

अब वह अड़चन जो इस पीठ की पहचान बन गई।

विद्वान डी. सी. सरकार इसके लिए कोई मंदिर या गाँव नहीं बताते। वे केवल इतना लिखते हैं कि गंडकी गंगा की सहायक नदी है और बख़्तियारपुर के पास उससे मिलती है।

यह नदी का भूगोल है, पीठ का पता नहीं। और एक नदी सैकड़ों किलोमीटर लंबी होती है — गंडकी नेपाल के हिमालय से निकलकर बिहार के मैदानों तक आती है। "गंडकी" कहने से यह तय नहीं होता कि पीठ उस धारा के किस बिंदु पर है।

मुक्तिनाथ वाला दावा

प्रचलित सूचियाँ इस पीठ को नेपाल के मुक्तिनाथ से जोड़ती हैं, जो गंडकी की ऊपरी धारा पर है।

पर वहाँ अंग शीश बताया जाता है, जबकि पीठनिर्णय गण्ड यानी कपोल कहता है। यह अंतर छोटा नहीं — पूरे संग्रह में जहाँ भी अंग मेल नहीं खाया, वहाँ पहचान संदिग्ध निकली।

इसलिए यहाँ कोई एक स्थान नहीं चुना गया। जब स्रोत केवल एक नदी का नाम देता हो, तो उसे किसी एक मंदिर पर टिका देना पाठक को यह भ्रम देना होगा कि प्रश्न हल हो चुका है।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण); पहचान पर D. C. Sircar (1948) व प्रचलित परंपरा

आज यह स्थान कहाँ है

इस पीठ का आधुनिक स्थान विद्वानों में एकमत नहीं है। नीचे दिया गया दावा स्रोत सहित है, पर अंतिम नहीं — अन्य परंपराएँ दूसरा स्थान बताती हैं।

  • गंडकी नदी का क्षेत्र (नेपाल से बिहार तक)सरकार किसी मंदिर का नाम नहीं देते — वे केवल बताते हैं कि गंडकी गंगा की सहायक नदी है और बख़्तियारपुर (पटना ज़िला) के पास उससे मिलती है। यानी पीठ का नाम नदी का है, किसी नगर का नहीं। (Sircar 1948, Index of Pithas)
  • मुक्तिनाथ, नेपालप्रचलित सूचियाँ इस पीठ को मुक्तिनाथ से जोड़ती हैं, जो गंडकी की ऊपरी धारा पर है। पर वहाँ अंग शीश बताया जाता है, जबकि पीठनिर्णय गण्ड यानी कपोल कहता है। (प्रचलित परंपरा)

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas — केवल नदी का भूगोल दिया गया है, किसी मंदिर या गाँव का नाम नहीं

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गंडकी शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न