FAQ
उज्जयिनी शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ कूर्पर, यानी कोहनी गिरी थी। यहाँ की शक्ति मंगलचंडी और भैरव कपिलांबर कहलाते हैं। अंग पर भी पूरी सहमति नहीं है — शिवचरित वाम-कफोणि, यानी बायीं कोहनी कहता है।
इस पर विद्वान एकमत नहीं हैं। डी. सी. सरकार अपनी अनुक्रमणिका में पहले उज्जैन (मध्य प्रदेश) देते हैं, पर साथ ही लिखते हैं कि उजानी भी देखिए — और उनकी उजानी प्रविष्टि इसे कोगराम, बर्दवान ज़िला, पश्चिम बंगाल बताती है। दोनों दावे इस पृष्ठ पर स्रोत सहित दिए गए हैं।
देवी का नाम मंगलचंडी और भैरव का कपिलांबर — दोनों बंगाल की परंपरा के नाम हैं। साथ ही पीठनिर्णय की सूची में इसके आस-पास के पीठ भी बंगाल के ही हैं, जैसे केतुग्राम, खीरग्राम और चट्टग्राम। यह प्रसंग बंगाल की ओर झुकता है, पर निर्णायक प्रमाण नहीं है।
अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र "उज्जयिन्यां महाकाली" कहता है, यानी वह उज्जैन को गिनता है। पर ध्यान रहे कि अष्टादश और पीठनिर्णय के इक्यावन दो अलग परंपराएँ हैं, एक दूसरे का उपसमुच्चय नहीं। दोनों का एक ही नाम लेना यह सिद्ध नहीं करता कि दोनों एक ही स्थान की बात कर रहे हैं।
मंगलचंडी की पूजा बंगाल में घर-घर होती रही है, विशेषकर स्त्रियों में — संतान और परिवार की कुशलता के लिए। ये लोक-परंपरा में गहराई से बसी हुई देवी हैं।
जब यही निश्चित नहीं कि यह पीठ किस नगर में है, तब किसी एक मंदिर के दर्शन समय छाप देना पाठक को भ्रमित करना होगा। यदि आप उज्जैन जा रहे हैं तो महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का पृष्ठ इसी संग्रह में उपलब्ध है।
