नेपाल शक्ति पीठ

nepāla

वह पीठ जिसका नाम एक पूरे देश का है — और इसीलिए जिसका ठीक स्थान तय नहीं होता।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
जानु
शक्ति
महामाया
भैरव
कपाली

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

इक्यावन में कुछ पीठों के नाम इतने बड़े हैं कि उनसे कोई एक बिंदु तय ही नहीं होता। नेपाल उनमें है।

पीठनिर्णय यहाँ जानु बताता है — घुटना। देवी महामाया कहलाईं, भैरव कपाली।

पर स्थान की बात आते ही कठिनाई शुरू होती है। "नेपाल" किसी नगर का नाम नहीं, एक पूरे देश का है। विद्वान डी. सी. सरकार लिखते हैं कि संकेत संभवतः काठमांडू की ओर है — और वे स्वयं "संभवतः" कहते हैं।

प्रचलित सूचियाँ इसे काठमांडू के गुह्येश्वरी मंदिर से जोड़ती हैं। पर वहाँ अंग और देवी दोनों अलग बताए जाते हैं, जो पीठनिर्णय के जानु और महामाया से मेल नहीं खाते। और इस संग्रह में जहाँ भी अंग मेल नहीं खाया, वहाँ पहचान संदिग्ध निकली है।

यह वही कठिनाई है जो गंडकी और लंका पर भी मिली — नाम इतना बड़ा कि उससे कोई एक स्थान नहीं बनता।

ध्यान रहे कि इसी सूची में नेपाल के भीतर एक और पीठ है — मिथिला, यानी जनकपुर। उसकी पहचान पर कोई विवाद नहीं। दोनों अलग हैं।

  • पीठ का नाम एक पूरे देश का है, किसी नगर या मंदिर का नहीं।
  • सरकार स्वयं "may be" कहते हैं — काठमांडू वाला संकेत निश्चित नहीं।
  • प्रचलित सूचियाँ गुह्येश्वरी मंदिर बताती हैं, पर वहाँ अंग व देवी मेल नहीं खाते।
  • इसी सूची में नेपाल के भीतर एक और पीठ है — मिथिला (जनकपुर), जिस पर कोई विवाद नहीं।

कथा

यहाँ का प्रश्न कथा का नहीं — यह है कि एक देश के नाम से कोई एक स्थान कैसे तय हो।

सती का जानु

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि नेपाल में जानु गिरा — घुटना। देवी महामाया हुईं, भैरव कपाली।

नाम बहुत बड़ा है

"नेपाल" किसी नगर का नाम नहीं, एक पूरे देश का है। और यही इस पीठ की मुख्य कठिनाई है।

विद्वान डी. सी. सरकार लिखते हैं कि संकेत संभवतः काठमांडू की ओर है। पर वे "संभवतः" कहते हैं — यानी वे भी निश्चित नहीं।

यह वही कठिनाई है जो इस सूची में दो और जगह मिलती है। गंडकी का नाम एक नदी का है, जो सैकड़ों किलोमीटर बहती है। लंका का अर्थ ही द्वीप है, और वह कोई भी द्वीप हो सकता है। तीनों जगह नाम इतना बड़ा है कि उससे कोई एक बिंदु नहीं बनता।

गुह्येश्वरी वाला दावा

प्रचलित सूचियाँ इस पीठ को काठमांडू के गुह्येश्वरी मंदिर से जोड़ती हैं।

पर वहाँ अंग और देवी दोनों अलग बताए जाते हैं, जो पीठनिर्णय के जानु और महामाया से मेल नहीं खाते।

इस संग्रह में एक बात बार-बार सिद्ध हुई है: जहाँ अंग मेल नहीं खाता, वहाँ पहचान संदिग्ध निकलती है। गंडकी पर भी यही हुआ, कन्याश्रम पर भी, श्रीपर्वत पर भी।

इसलिए यहाँ कोई एक स्थान नहीं चुना गया। सब दावे रख दिए गए हैं, ताकि पाठक स्वयं देख सके कि प्रश्न कहाँ खुला है।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण); पहचान पर D. C. Sircar (1948) व प्रचलित परंपरा

आज यह स्थान कहाँ है

इस पीठ का आधुनिक स्थान विद्वानों में एकमत नहीं है। नीचे दिया गया दावा स्रोत सहित है, पर अंतिम नहीं — अन्य परंपराएँ दूसरा स्थान बताती हैं।

नेपाल

  • काठमांडूसरकार लिखते हैं कि संकेत संभवतः काठमांडू की ओर है — पर वे स्वयं "may be" कहते हैं, यानी यह निश्चित नहीं। (Sircar 1948, Index of Pithas)
  • गुह्येश्वरी मंदिर, काठमांडूप्रचलित सूचियाँ इसे गुह्येश्वरी मंदिर से जोड़ती हैं। पर वहाँ अंग व देवी दोनों अलग बताए जाते हैं, जो पीठनिर्णय के जानु व महामाया से मेल नहीं खाते। (प्रचलित परंपरा)
  • पूरा नेपाल-क्षेत्रपीठ का नाम एक पूरे देश का है, किसी नगर या मंदिर का नहीं। यह वही कठिनाई है जो गंडकी और लंका पर भी मिलती है — जहाँ नाम इतना बड़ा है कि उससे कोई एक बिंदु तय नहीं होता। (पीठनिर्णय का पाठ)

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas — "the reference may be to Katmandu, the capital of Nepal"

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नेपाल शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न