FAQ
विभास शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ वाम-गुल्फ — बायाँ टखना — गिरा। यहाँ की शक्ति भीमरूपा (कपालिनी) और भैरव कपाली कहलाते हैं। भैरव के लिए सर्वानंद नाम भी मिलता है।
यह स्थानीय परंपरा का नाम है और आज सबसे प्रचलित भी। पीठनिर्णय में देवी का नाम भीमरूपा है और कपालिनी भी दर्ज है। तीनों नामों में "भीम" है, यानी भयंकर या विशाल।
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में, ताम्रलिप्त यानी आज के तमलुक के निकट। विद्वान डी. सी. सरकार की अनुक्रमणिका भी यही स्थान बताती है और इस पर कोई मतभेद नहीं है।
ताम्रलिप्त प्राचीन भारत का एक प्रमुख बंदरगाह था — वह द्वार जहाँ से पूर्व की ओर जहाज़ जाते थे। सदियों तक व्यापारी, भिक्षु और यात्री यहाँ से आते-जाते रहे।
इस मंदिर का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं मिला जिससे दर्शन समय सत्यापित किए जा सकें, और बिना पुष्टि के समय छापना इस संग्रह के नियम के विरुद्ध है।
