विभास शक्ति पीठ

vibhāsa

प्राचीन बंदरगाह-नगर ताम्रलिप्त के पास वह पीठ, जहाँ सती का बायाँ गुल्फ गिरा।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
वाम-गुल्फ
शक्ति
भीमरूपा
भैरव
कपाली

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

विभास का स्थान इस सूची में उन थोड़े पीठों में है जिनके आसपास का इतिहास पूजा से भी बड़ा है।

यह ताम्रलिप्त के पास है — आज का तमलुक। ताम्रलिप्त प्राचीन भारत का एक बड़ा बंदरगाह था, वह द्वार जहाँ से जहाज़ पूर्व की ओर जाते थे। जिस भूमि पर सदियों तक व्यापारी, भिक्षु और यात्री उतरते-चढ़ते रहे, उसी के पास यह पीठ है।

पीठनिर्णय यहाँ वाम-गुल्फ बताता है — बायाँ टखना। देवी भीमरूपा कहलाईं, जिन्हें कपालिनी भी कहा जाता है, और भैरव कपाली।

स्थानीय परंपरा में देवी बर्गभीमा के नाम से जानी जाती हैं, और यही नाम आज सबसे प्रचलित है।

गुल्फ वह जोड़ है जिस पर चलने का पूरा भार आता है। एक बंदरगाह के पास, जहाँ लोग हमेशा आते-जाते रहे, चलने से जुड़े अंग का गिरना — यह जोड़ किसी ने बनाया नहीं, बन गया।

  • प्राचीन बंदरगाह-नगर ताम्रलिप्त (तमलुक) के निकट।
  • देवी को स्थानीय परंपरा में बर्गभीमा कहा जाता है; पीठनिर्णय में भीमरूपा।
  • भैरव के नाम पर पाठभेद — कपाली, और सर्वानंद भी।
  • S0 की उन तेरह पंक्तियों में, जिनसे इस संग्रह का extraction स्वतंत्र रूप से जाँचा गया।

कथा

कथा वही है जो सबकी — पर इस स्थान का परिवेश उसे एक अलग रंग देता है।

सती का वाम गुल्फ

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि विभास में वाम-गुल्फ गिरा — बायाँ टखना। देवी भीमरूपा हुईं, भैरव कपाली।

ताम्रलिप्त की भूमि

यह पीठ ताम्रलिप्त के पास है, जिसे आज तमलुक कहते हैं।

ताम्रलिप्त प्राचीन भारत का एक प्रमुख बंदरगाह था — वह द्वार जहाँ से पूर्व की ओर जहाज़ जाते थे। व्यापारी, भिक्षु, यात्री — सदियों तक यहाँ से लोग आते-जाते रहे।

गुल्फ वह जोड़ है जिस पर चलने का पूरा भार आता है। एक ऐसे नगर के पास, जहाँ आना-जाना ही जीवन था, चलने से जुड़े अंग का गिरना — यह संगति किसी ने जोड़ी नहीं, अपने आप बन गई।

देवी के तीन नाम

पीठनिर्णय देवी को भीमरूपा कहता है और कपालिनी नाम भी दर्ज है। पर स्थानीय लोग उन्हें बर्गभीमा के नाम से जानते हैं, और आज यही नाम सबसे प्रचलित है।

तीनों नामों में "भीम" है — भयंकर, विशाल। यह उन देवियों में हैं जिनका रूप कोमल नहीं बताया गया।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण)

आज यह स्थान कहाँ है

बर्गभीमा (भीमरूपा) मंदिर, ताम्रलिप्त (तमलुक) के निकट, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल, भारत

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas — "near Tamluk in the Midnapur District, Bengal"

यात्रा सुझाव

प्रमुख पर्व: नवरात्रि · दुर्गा पूजा

विभास शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न