FAQ
रामगिरि शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह निश्चित नहीं है। पीठनिर्णय की प्रतियों में तीन अलग अंग मिलते हैं — स्तन, नासा और नाल। इस संग्रह में पहला पाठ (स्तन) मुख्य रखा गया है। देवी चण्डा और भैरव नल कहलाते हैं; देवी के लिए रामकिणी व शिवानी नाम भी मिलते हैं।
यह भी तय नहीं। विद्वान डी. सी. सरकार इतना कहते हैं कि "राजगिरि" — जो इसी पीठ का पाठभेद है — संभवतः राजगृह यानी बिहार के राजगीर का ही रूप है। वे "संभवतः" कहते हैं और उससे आगे कुछ नहीं।
कालिदास के मेघदूत में यक्ष जिस पर्वत पर निर्वासित था उसका नाम रामगिरि है, और उसे प्रायः नागपुर के पास रामटेक से जोड़ा जाता है। पर वह साहित्यिक पहचान है — सरकार इस पीठ के संदर्भ में उसका उल्लेख नहीं करते। दो परंपराओं में एक ही नाम आ जाना उन्हें एक नहीं कर देता।
हाँ। इस सूची में प्रायः एक अंग निश्चित होता है और कहीं-कहीं एक पाठभेद जुड़ जाता है। तीन अलग पाठ मिलना बताता है कि इस पंक्ति की नक़ल में कहीं गहरी गड़बड़ी हुई।
जब स्थान ही अनिश्चित है, तब किसी एक मंदिर की जानकारी छापना पाठक को भ्रमित करना होगा।
