गोदावरीतीर शक्ति पीठ

godāvarītīra

गोदावरी के तट का वह पीठ जिसकी पंक्ति एक प्रति में टूटी थी — और दूसरी प्रति से पूरी हुई।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
वाम-गण्ड
शक्ति
विश्वेशी
भैरव
विश्वेश

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय) — Motilal Banarsidass संस्करण से पुष्ट

महत्व

गोदावरीतीर का नाम ही उसका पता है — गोदावरी नदी का तट। पीठनिर्णय यहाँ वाम-गण्ड बताता है, यानी बायाँ कपोल। देवी विश्वेशी कहलाईं, भैरव विश्वेश।

दाहिना कपोल इसी सूची में गंडकी पीठ पर आता है — दोनों गाल अलग-अलग स्थानों पर।

इस पीठ की एक अलग कहानी भी है, जो सामग्री की नहीं, उस तक पहुँचने की है। इस संग्रह के बाक़ी पचास पीठ डी. सी. सरकार के 1948 के समीक्षित संस्करण की एक डिजिटल प्रति से निकाले गए। पर उसमें इस एक पीठ की पंक्ति ठीक वहाँ पड़ती है जहाँ पृष्ठ बदलता है, और मशीन-पठन में वहाँ स्तंभ टूट गए थे। महीनों तक इस record में देवी और भैरव के स्थान खाली रहे।

उन्हें अनुमान से भरा जा सकता था — आसपास के पीठों से मिलते-जुलते नाम लिख देना कठिन नहीं था, और शायद कोई पकड़ता भी नहीं। पर तब पाठक के पास यह जानने का कोई तरीक़ा नहीं रहता कि बाक़ी पचास नाम भी अनुमान नहीं हैं।

उत्तर उसी पुस्तक की **दूसरी प्रति** से मिला, जिसका पृष्ठ-क्रम अलग है — इसलिए वही पंक्ति वहाँ पूरी छपी थी। दो अलग संस्करणों का मेल ही इसे पक्का करता है।

पर स्थान अब भी अज्ञात है। अनुक्रमणिका की गोदावरी वाली प्रविष्टि पहली प्रति में उसी पृष्ठ-सन्धि पर खोई है और दूसरी प्रति में अनुक्रमणिका शामिल ही नहीं। इसलिए यह पृष्ठ बताता है कि यहाँ क्या गिरा, पर यह नहीं कि वह जगह आज कहाँ है।

  • देवी व भैरव के नाम एक प्रति में पृष्ठ-सन्धि पर कट गए थे; दूसरे संस्करण से पूरे हुए।
  • अंग वाम-गण्ड (बायाँ कपोल); दाहिना कपोल गंडकी पीठ पर आता है।
  • देवी के लिए राकिणी और भैरव के लिए दण्डपाणि व वत्सनाभ नाम भी दर्ज हैं।
  • नाम एक नदी के तट का है, जैसे करतोयातट, सुगंधा, गंडकी और नर्मदा।

कथा

यहाँ की कथा वही है जो सबकी — पर इस पीठ की अपनी एक कहानी उस तक पहुँचने की भी है।

सती का वाम गण्ड

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि गोदावरी के तट पर वाम-गण्ड गिरा — बायाँ कपोल। देवी विश्वेशी हुईं, भैरव विश्वेश। कुछ प्रतियों में देवी का नाम राकिणी और भैरव के लिए दण्डपाणि व वत्सनाभ भी मिलते हैं।

दाहिना कपोल इसी सूची में गंडकी पीठ पर आता है — दोनों गाल अलग-अलग स्थानों पर।

एक पंक्ति जो पृष्ठ बदलते ही खो गई

इस संग्रह के बाक़ी पचास पीठ डी. सी. सरकार के 1948 के समीक्षित संस्करण की एक डिजिटल प्रति से निकाले गए। पर उसमें इस एक पीठ की पंक्ति ठीक वहाँ पड़ती है जहाँ पृष्ठ बदलता है, और मशीन-पठन में वहाँ स्तंभ टूट गए थे।

देवी और भैरव के टुकड़े दिखाई तो देते थे, पर यह तय नहीं हो पा रहा था कि वे किस पंक्ति के हैं। लंबे समय तक इस record में वे दो स्थान खाली रहे।

उन्हें अनुमान से भरा जा सकता था। आसपास के पीठों से मिलते-जुलते नाम लिख देना कठिन नहीं था, और शायद कोई पकड़ता भी नहीं। पर तब पाठक के पास यह जानने का कोई तरीक़ा नहीं रहता कि बाक़ी पचास नाम भी अनुमान नहीं हैं। एक अनुमानित प्रविष्टि पचास सत्यापित प्रविष्टियों की विश्वसनीयता ले डूबती है।

दूसरी प्रति से उत्तर

अंततः उत्तर अनुमान से नहीं, उसी पुस्तक की **दूसरी प्रति** से मिला।

मोतीलाल बनारसीदास वाले संस्करण का पृष्ठ-क्रम अलग है — इसलिए वही पंक्ति वहाँ बीच पृष्ठ में पड़ती है, टूटी नहीं। वहाँ पूरी पंक्ति पढ़ी जा सकी, और वह पहली प्रति के बिखरे टुकड़ों से भी मेल खाती है।

दो अलग संस्करणों का यही मेल इसे पक्का करता है। एक ही प्रति से पढ़ा गया होता तो संदेह बना रहता।

पर स्थान अब भी अज्ञात है

अंग, देवी और भैरव — तीनों मिल गए। पर यह पीठ आज कहाँ है, यह अब भी ज्ञात नहीं।

विद्वानों की अनुक्रमणिका में गोदावरी वाली प्रविष्टि पहली प्रति में उसी पृष्ठ-सन्धि पर खोई हुई है, और दूसरी प्रति में अनुक्रमणिका शामिल ही नहीं।

इसलिए यह पृष्ठ बताता है कि यहाँ क्या गिरा, पर यह नहीं कि वह जगह आज कहाँ है। इस संग्रह में ये दो अलग दावे हैं और अलग ही रखे जाते हैं — एक का पूरा होना दूसरे को पूरा नहीं कर देता।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण); पंक्ति मोतीलाल बनारसीदास संस्करण से पुष्ट

आज यह स्थान कहाँ है

इस पीठ की कोई निश्चित आधुनिक पहचान उपलब्ध नहीं है। इसीलिए यहाँ मंदिर, दर्शन समय या यात्रा की जानकारी नहीं दी गई है — अनुमान लगाना भ्रामक होता।

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas — प्रविष्टि पृष्ठ-सन्धि पर कट जाती है

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गोदावरीतीर शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न