FAQ
गोदावरीतीर शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ वाम-गण्ड — बायाँ कपोल — गिरा। यहाँ की शक्ति विश्वेशी और भैरव विश्वेश कहलाते हैं; कुछ प्रतियों में देवी का नाम राकिणी तथा भैरव के लिए दण्डपाणि व वत्सनाभ भी मिलते हैं। दाहिना कपोल इसी सूची में गंडकी पीठ पर आता है।
हाँ, कुछ समय तक थी। इस संग्रह के बाक़ी पचास पीठ जिस डिजिटल प्रति से निकाले गए, उसमें इस एक पीठ की पंक्ति ठीक पृष्ठ-सन्धि पर पड़ती है और मशीन-पठन में वहाँ स्तंभ टूट गए थे। इसलिए देवी और भैरव के स्थान खाली छोड़े गए थे।
अनुमान से नहीं — उसी पुस्तक की दूसरी प्रति से। मोतीलाल बनारसीदास वाले संस्करण का पृष्ठ-क्रम अलग है, इसलिए वही पंक्ति वहाँ टूटी नहीं थी और पूरी पढ़ी जा सकी। वह पहली प्रति के बिखरे टुकड़ों से भी मेल खाती है, और दो अलग संस्करणों का यही मेल इसे पक्का करता है।
क्योंकि इस संग्रह की पूरी नींव यही है कि जो पाठ में है वही लिखा जाए। बाक़ी पचास पीठों पर हर नाम स्रोत से निकाला और उद्धृत किया गया है। यदि यहाँ एक नाम अनुमान से डाल दिया जाता, तो पाठक के पास यह जानने का कोई तरीक़ा नहीं रहता कि बाक़ी नाम भी अनुमान नहीं हैं।
यह भी ज्ञात नहीं है। नाम से इतना पता चलता है कि यह गोदावरी नदी के तट पर कहीं था। ध्यान रहे कि विद्वान जनस्थान पीठ को भी "नासिक क्षेत्र में गोदावरी पर" रखते हैं — पर दोनों अलग पीठ हैं।
