सुगंधा शक्ति पीठ

sugandhā

सुगंधा नदी के किनारे वह पीठ जहाँ नासिका गिरी — नाम, नदी और अंग तीनों गंध पर आ मिलते हैं।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
नासिका
शक्ति
सुनंदा
भैरव
त्र्यंबक

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

इस पीठ में एक संगति है जो पढ़ते ही दिख जाती है।

नदी का नाम सुगंधा है — अच्छी गंध वाली। स्थान का नाम भी उसी नदी से पड़ा। और पीठनिर्णय यहाँ जो अंग बताता है वह है नासिका — नाक, जिससे गंध ली जाती है।

तीनों एक ही बिंदु पर आ मिलते हैं, और किसी ने इन्हें जोड़ा नहीं लगता।

देवी यहाँ सुनंदा कहलाती हैं, यद्यपि सुगंधा नाम भी दर्ज है — वह संभवतः नदी से आया। भैरव त्र्यंबक हैं।

मंदिर शिकारपुर में है, बरिसाल के पास, जो आज बांग्लादेश के दक्षिणी भाग में पड़ता है। यह इक्यावन के उन पीठों में है जो भारत के बाहर हैं, और जिनके बारे में यात्रा की जानकारी सत्यापित करना कठिन है।

करतोयातट की तरह यह भी एक नदी के नाम पर बना पीठ है। बंगाल की भूमि नदियों से बुनी हुई है, और उसकी तीर्थ-सूची में यह बात अपने आप उतर आई।

  • नदी का नाम सुगंधा, स्थान का नाम उसी से, और अंग नासिका — तीनों गंध पर आ मिलते हैं।
  • देवी सुनंदा; सुगंधा नाम भी दर्ज है, जो संभवतः नदी से आया।
  • करतोयातट की तरह यह भी नदी के नाम पर बना पीठ है।
  • बांग्लादेश के दक्षिणी भाग में, बरिसाल के पास।

कथा

यहाँ नाम, नदी और अंग तीनों एक ही बात कहते हैं — और यह संयोग जैसा नहीं लगता।

सती की नासिका

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि सुगंधा में नासिका गिरी — नाक। देवी सुनंदा हुईं, भैरव त्र्यंबक।

नाम में गंध

नदी का नाम सुगंधा है — अच्छी गंध वाली। स्थान का नाम उसी नदी से पड़ा। और जो अंग यहाँ गिरा वह नासिका है, जिससे गंध ली जाती है।

तीनों एक ही बिंदु पर आ मिलते हैं। इस सूची में ऐसी संगतियाँ बार-बार मिलती हैं — अट्टहास में हँसी, नलहाटी में कंठ-नाल, मणिकर्णिका में कान का रत्न। हर बार लगता है कि नाम और कथा एक-दूसरे को थामे हुए हैं।

देवी का एक नाम सुगंधा भी दर्ज है, जो संभवतः नदी से ही आया।

नदियों की भूमि

यह पीठ बंगाल के दक्षिणी भाग में है, बरिसाल के पास, जो आज बांग्लादेश में पड़ता है।

इक्यावन में एक और पीठ भी नदी के नाम पर बना है — करतोयातट, यानी करतोया का तट। दोनों बंगाल में हैं, और यह संयोग नहीं। बंगाल की भूमि नदियों से बुनी हुई है; वहाँ की तीर्थ-सूची में यह बात अपने आप उतर आई।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण)

आज यह स्थान कहाँ है

शिकारपुर, सोंधा (सुगंधा) नदी पर, बरिसाल, बांग्लादेश

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas — "modern Shikarpur on the Sondha (Sugandha) near Barisal in South Bengal"

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यात्रा सुझाव

प्रमुख पर्व: नवरात्रि

सुगंधा शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न