FAQ
शुचि शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ ऊर्ध्व-दन्त — ऊपर के दाँत — गिरे। यहाँ की शक्ति नारायणी और भैरव संहार कहलाते हैं; भैरव के लिए संक्रूर नाम भी मिलता है।
यह ज्ञात नहीं है। विद्वान डी. सी. सरकार कोई स्थान नहीं बताते — उनकी पूरी प्रविष्टि में केवल एक इशारा है, "सुपार्श्व देखिए", और वह भी "cf." के साथ, जिसका अर्थ है तुलना कीजिए, बराबर मत मानिए।
हाँ। कुछ प्रतियों में इस पीठ का नाम "अनल" मिलता है, जिसका अर्थ अग्नि है — जबकि शुचि का अर्थ पवित्र या शुद्ध। दोनों में न ध्वनि का संबंध है न अर्थ का, और यह संकेत देता है कि इस पंक्ति की नक़ल में गड़बड़ी हुई होगी।
क्योंकि इससे अधिक विश्वसनीय रूप से ज्ञात नहीं है। जहाँ स्रोत केवल इशारा करता हो, वहाँ इस संग्रह ने भी इशारे से आगे जाने से इनकार किया है।
हाँ, दो और — कालमाधव और पंचसागर। इन तीनों की कोई आधुनिक पहचान उपलब्ध नहीं है।
