FAQ
नलहाटी शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ नाल — कंठ की नली — गिरा। यहाँ की शक्ति काली और भैरव योगीश कहलाते हैं। प्रचलित परंपरा भी यही कहती है।
नगर का नाम उसी "नाल" से बना माना जाता है जो यहाँ गिरा — कंठ की नली। इसी से देवी नलहाटेश्वरी कहलाईं।
स्थान पर कोई मतभेद नहीं — विद्वान इसे बीरभूम ज़िले की नलहाटी ही मानते हैं। पर शिवचरित नामक ग्रंथ में एक पाठभेद है, जहाँ अंग सिरानालि और देवी सेफालिका बताई गई हैं। इस संग्रह में पीठनिर्णय वाला पाठ मुख्य रखा गया है।
हाँ। नलहाटी उन आठ नामों में है जो पीठनिर्णय की कुछ प्रतियों में नहीं मिलते, और जिनके कारण बंगाल में बावन पीठों की मान्यता बनी। इससे यहाँ की पूजा-परंपरा कम नहीं होती — वह सदियों पुरानी है — पर पाठ का इतिहास जैसा है वैसा बताना उचित है।
मंदिर से जुड़ी एक वेबसाइट अवश्य है, पर उससे दर्शन समय सत्यापित नहीं किए जा सके। बिना पुष्टि के समय छापना इस संग्रह के नियम के विरुद्ध है। यात्रा से पूर्व स्थानीय स्तर पर पुष्टि कर लें।
