FAQ
जनस्थान शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ चिबुक — ठुड्डी — गिरी। यहाँ की शक्ति भ्रामरी और भैरव विकृत (विकृताक्ष) कहलाते हैं। प्रचलित परंपरा भी यही अंग बताती है।
विद्वान डी. सी. सरकार इसे नासिक क्षेत्र में गोदावरी के तट पर रखते हैं। वे किसी एक मंदिर का नाम नहीं देते — क्षेत्र बताते हैं।
हाँ। जनस्थान दंडकारण्य का वही भाग है जहाँ पंचवटी थी — जहाँ राम, सीता और लक्ष्मण वनवास के दिनों में रहे और जहाँ से सीता का हरण हुआ। इस एक भूमि पर दो अलग परंपराएँ आ मिलती हैं।
भ्रमर यानी भौंरा; भ्रामरी वह जो भौंरों से जुड़ी हैं। यही नाम त्रिस्रोता पीठ पर भी आता है और श्रीशैलम् की भ्रमराम्बा भी इसी मूल से हैं — जहाँ कथा है कि देवी ने भौंरों के झुंड छोड़कर अरुणासुर का वध किया, क्योंकि उसे दो या चार पैर वालों से अभय था और भौंरे के छह पैर होते हैं।
सरकार किसी एक मंदिर का नाम नहीं देते, केवल क्षेत्र बताते हैं — और कोई आधिकारिक स्रोत भी नहीं मिला जिससे समय सत्यापित किए जा सकें।
