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FAQ
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाकालेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। उज्जैन को शास्त्रों में अवंतिका कहा गया है और यह सात मोक्षदायिनी पुरियों में गिनी जाती है।
मंदिर सामान्यतः सुबह 4:00 बजे से रात 11:00 बजे तक दर्शन हेतु खुला रहता है। श्रावण मास, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर समय बदलता है, इसलिए यात्रा से पहले मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि अवश्य कर लें।
भस्म आरती दिन की पहली आरती है, जो प्रातः 4:00 बजे होती है और महाकाल की सबसे विशिष्ट परंपरा मानी जाती है। इसमें सम्मिलित होने के लिए अग्रिम ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है — यह वॉक-इन दर्शन नहीं है। बुकिंग केवल मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से करें, वैध पहचान पत्र अपलोड करना होता है, और दर्शन के समय मूल पहचान पत्र साथ रखना आवश्यक है।
भस्म आरती के लिए पारंपरिक वस्त्र अनिवार्य हैं — पुरुषों के लिए धोती और महिलाओं के लिए साड़ी। नियत समय से लगभग डेढ़ से दो घंटे पहले पहुँचने की व्यवस्था रखें।
यह बारह ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है और परंपरा में इसे स्वयंभू माना जाता है। साथ ही भस्म आरती की परंपरा इस रूप में किसी अन्य ज्योतिर्लिंग में नहीं होती। उज्जैन को महाकाल की नगरी और महाकाल को इस नगरी का राजा माना जाता है।
निकटतम हवाई अड्डा इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा है, जो लगभग 58 किमी दूर है। रेल मार्ग से उज्जैन जंक्शन मंदिर से लगभग 2 किमी दूर है और देश के प्रमुख नगरों से सीधा जुड़ा है। सड़क मार्ग से इंदौर लगभग 55 किमी और भोपाल लगभग 190 किमी दूर है।
मंदिर तीन तलों पर है — नीचे महाकालेश्वर, ऊपर ओंकारेश्वर और सबसे ऊपर नागचंद्रेश्वर। नागचंद्रेश्वर के दर्शन वर्ष में केवल एक दिन, नागपंचमी को होते हैं।

