श्री महाकाल भगवान की महिमा अपरम्पार,
पूरी करते कामना भक्तों की करतार॥
श्री महाकाल भगवान की महिमा अपरम्पार है; वे भक्तों की कामना पूरी करने वाले करतार हैं।
विद्या – बुद्धि – तेज – बल – दूध – पूत – धन – धान,
अपने अक्षय कोष से भगवान करो प्रदान॥
हे भगवान, अपने अक्षय कोष से हमें विद्या, बुद्धि, तेज, बल, दूध, पुत्र, धन और धान्य प्रदान कीजिए।
1जय महाकाल काल के नाशक।
जय त्रिलोकपति मोक्ष प्रदायक॥
काल का भी नाश करने वाले महाकाल की जय हो; तीनों लोकों के स्वामी और मोक्ष देने वाले की जय हो।
2मृत्युंजय भवबाधा हारी।
शत्रुंजय करो विजय हमारी॥
आप मृत्यु को जीतने वाले और भव की बाधा हरने वाले हैं; शत्रुओं को जीतने वाले हैं — हमें भी विजय दीजिए।
3आकाश में तारक लिंगम्।
पाताल में हाटकेश्वरम्॥
आकाश में तारक लिंग हैं, पाताल में हाटकेश्वर।
4भूलोक में महाकालेश्वरम्।
सत्यम् – शिवम् और सुन्दरम्॥
और भूलोक में महाकालेश्वर — जो सत्यम्, शिवम् और सुन्दरम् हैं।
5क्षिप्रा तट ऊखर शिव भूमि।
महाकाल वन पावन भूमि॥
क्षिप्रा के तट की यह ऊसर भूमि शिव की भूमि है; महाकाल वन यह पावन भूमि है।
6आशुतोष भोले भण्डारी।
नटराज बाघम्बरधारी॥
आप आशुतोष हैं, भोले भण्डारी हैं; नटराज हैं और बाघम्बर धारण करने वाले हैं।
7सृष्टि को प्रारम्भ कराते।
कालचक्र को आप चलाते॥
आप ही सृष्टि का प्रारम्भ कराते हैं और आप ही कालचक्र चलाते हैं।
8तीर्थ अवन्ती में हैं बसते।
दर्शन करते संकट हरते॥
आप अवन्ती (उज्जैन) तीर्थ में बसते हैं; जो दर्शन करता है, उसके संकट हर लेते हैं।
9विष पीकर शिव निर्भय करते।
नीलकण्ठ महाकाल कहाते॥
विष पीकर शिव ने सबको निर्भय किया; इसी से वे नीलकण्ठ और महाकाल कहलाए।
10महादेव ये महाकाल हैं।
निराकार का रूप धरे हैं॥
ये महादेव ही महाकाल हैं; निराकार होकर भी उन्होंने रूप धारण किया है।
11ज्योतिर्मय – ईशान अधीश्वर।
परम् ब्रह्म हैं महाकालेश्वर॥
वे ज्योतिर्मय हैं, ईशान के अधीश्वर हैं; महाकालेश्वर परम ब्रह्म हैं।
12आदि सनातन – स्वयं ज्योतिश्वर।
महाकाल प्रभु हैं सर्वेश्वर॥
वे आदि हैं, सनातन हैं, स्वयं ज्योति के स्वामी हैं; महाकाल प्रभु ही सर्वेश्वर हैं।
13जय महाकाल महेश्वर जय – जय।
जय हरसिद्धि महेश्वरी जय – जय॥
महाकाल महेश्वर की जय-जय; हरसिद्धि महेश्वरी की जय-जय।
14शिव के साथ शिवा है शक्ति।
भक्तों की है रक्षा करती॥
शिव के साथ शिवा शक्ति हैं, जो भक्तों की रक्षा करती हैं।
15जय नागेश्वर – सौभाग्येश्वर।
जय भोले बाबा सिद्धेश्वर॥
जय नागेश्वर, जय सौभाग्येश्वर; जय भोले बाबा सिद्धेश्वर।
16ऋणमुक्तेश्वर – स्वर्ण जालेश्वर।
अरुणेश्वर बाबा योगेश्वर॥
जय ऋणमुक्तेश्वर, जय स्वर्ण जालेश्वर; जय अरुणेश्वर, जय बाबा योगेश्वर।
17पंच – अष्ट – द्वादश लिंगों की।
महिमा सबसे न्यारी इनकी॥
पाँच, आठ और बारह लिंगों की महिमा है — पर इनकी महिमा सबसे निराली है।
18श्रीकर गोप को दर्शन दे तारी।
नंद बाबा की पीढ़ियाँ सारी॥
आपने श्रीकर नाम के गोप को दर्शन देकर तार दिया, और नंद बाबा की सारी पीढ़ियों को भी।
19भक्त चंद्रसेन राजा शरण आए।
विजयी करा रिपु – मित्र बनाये॥
भक्त राजा चंद्रसेन आपकी शरण में आए; आपने उन्हें विजयी बनाया और शत्रुओं को मित्र कर दिया।
20दैत्य दूषण भस्म किए।
और भक्तों से महाकाल कहाए॥
आपने दैत्य दूषण को भस्म कर दिया, और तभी से भक्तों ने आपको महाकाल कहा।
21दुष्ट दैत्य अंधक जब आया।
मातृकाओं से नष्ट कराया॥
जब दुष्ट दैत्य अंधक आया, तो आपने मातृकाओं से उसका नाश करवाया।
22जगज्जननी हैं माँ गिरि तनया।
श्री भोलेश्वर ने मान बढ़ाया॥
जगत की जननी माँ गिरितनया (पार्वती) हैं; श्री भोलेश्वर ने उनका मान बढ़ाया।
23श्री हरि की तर्जनी से हर – हर।
क्षिप्रा भी लाए गंगाधर॥
श्री हरि की तर्जनी से 'हर-हर' करते हुए गंगाधर क्षिप्रा को भी ले आए।
24अमृतमय पावन जल पाया।
‘ऋषि’ देवों ने पुण्य बढ़ाया॥
इससे अमृतमय पावन जल प्राप्त हुआ, और ऋषियों तथा देवताओं का पुण्य बढ़ा।
25नमः शिवाय मंत्र पंचाक्षरी।
इनका मंत्र बड़ा भयहारी॥
"नमः शिवाय" यह पंचाक्षरी मंत्र है; इनका यह मंत्र बड़ा भय हरने वाला है।
26जिसके जप से मिटती सारी।
चिंता – क्लेश – विपद् संसारी॥
जिसके जप से संसार की सारी चिंता, क्लेश और विपत्ति मिट जाती है।
27सिर जटा – जूट – तन भस्म सजै।
डम – डम – डमरू त्रिशूल सजै॥
सिर पर जटा-जूट है, तन पर भस्म सजी है; डम-डम डमरू और त्रिशूल शोभा देते हैं।
28शमशान विहारी भूतपति।
विषधर धारी जय उमापति॥
आप श्मशान में विहार करने वाले भूतपति हैं; विषधर सर्प धारण करने वाले उमापति की जय हो।
29रुद्राक्ष विभूषित शिवशंकर।
त्रिपुण्ड विभूषित प्रलयंकर॥
शिवशंकर रुद्राक्ष से विभूषित हैं; प्रलयंकर त्रिपुण्ड से विभूषित हैं।
30सर्वशक्तिमान – सर्व गुणाधार।
सर्वज्ञ – सर्वोपरि – जगदीश्वर॥
आप सर्वशक्तिमान और सब गुणों के आधार हैं; सर्वज्ञ, सर्वोपरि और जगदीश्वर हैं।
31अनादि – अनंत – नित्य – निर्विकारी।
महाकाल प्रभु – रूद्र – अवतारी॥
आप अनादि, अनंत, नित्य और निर्विकार हैं; महाकाल प्रभु रुद्र के अवतार हैं।
32धाता – विधाता – अज – अविनाशी।
मृत्यु रक्षक सुखराशी॥
आप धाता हैं, विधाता हैं, अजन्मा और अविनाशी हैं; मृत्यु से रक्षा करने वाले और सुख की राशि हैं।
33त्रिदल – त्रिनेत्र – त्रिपुण्ड – त्रिशूलधर।
त्रिकाय – त्रिलोकपति महाकालेश्वर॥
आप त्रिदल, त्रिनेत्र, त्रिपुण्ड और त्रिशूल धारण करने वाले हैं; त्रिकाय और त्रिलोक के पति महाकालेश्वर हैं।
34त्रिदेव – त्रयी हैं एकेश्वर।
निराकार शिव योगीश्वर॥
तीनों देव और तीनों वेद मिलकर एक ही ईश्वर हैं; निराकार शिव ही योगीश्वर हैं।
35एकादश – प्राण – अपान – व्यान।
उदान – नाग – कुर्म – कृकल समान॥
ग्यारह — प्राण, अपान, व्यान, उदान, नाग, कूर्म, कृकल और समान —
36देवदत्त धनंजय रहें प्रसन्न।
मन हो उज्जवल जब करें ध्यान॥
देवदत्त और धनंजय भी प्रसन्न रहें; ध्यान करने पर मन उज्ज्वल हो जाए।
37अघोर – आशुतोष – जय औढरदानी।
अभिषेक प्रिय श्री विश्वेश्वर ध्यानी॥
हे अघोर, हे आशुतोष, हे औढरदानी — आपकी जय हो; अभिषेक-प्रिय श्री विश्वेश्वर का ध्यान करता हूँ।
38कल्याणमय – आनंद स्वरुप शशि शेखर।
श्री भोलेशंकर जय महाकालेश्वर॥
आप कल्याणमय और आनंद-स्वरूप शशिशेखर हैं; श्री भोलेशंकर महाकालेश्वर की जय हो।
39प्रथम पूज्य श्री गणेश हैं, ऋद्धि – सिद्धि संग।
देवों के सेनापति, महावीर स्कंध॥
प्रथम पूज्य श्री गणेश ऋद्धि-सिद्धि सहित हैं; देवों के सेनापति महावीर स्कंद (कार्तिकेय) हैं।
40अन्नपूर्णा माँ पार्वती, जग को देती अन्न।
महाकाल वन में बसे, महाकाल के संग॥
माँ पार्वती अन्नपूर्णा रूप में जगत को अन्न देती हैं; वे महाकाल वन में महाकाल के संग बसती हैं।
शिव कहें जग राम हैं, राम कहें जग शिव।
धन्य – धन्य माँ शारदा, ऐसी ही दो प्रीत॥
शिव कहते हैं कि जगत राम है और राम कहते हैं कि जगत शिव है; हे माँ शारदा, आप धन्य हैं — हमें भी ऐसी ही प्रीत दीजिए।
श्री महाकाल चालीसा, प्रेम से, नित्य करे जो पाठ।
कृपा मिले महाकाल की, सिद्ध होय सब काज॥
जो प्रेम से नित्य श्री महाकाल चालीसा का पाठ करता है, उसे महाकाल की कृपा मिलती है और उसके सब काम सिद्ध होते हैं।