समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
7
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
रविवार; मंगलवार; कालाष्टमी; भैरव अष्टमी
उद्देश्य:रक्षा (Protection)भय-निवारण (Freedom from fear)संकट-मोचन (Relief from troubles)
✓ संपूर्ण
"जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा" भैरव बाबा की प्रचलित आरती है। इसके सात पद हैं। आरती भैरव को "पाप उद्धारक, दुःख सिन्धु तारक" कहती है और कहती है कि उनके बिना देव-सेवा सफल नहीं होती; अंत में वे बटुकनाथ — बालक भैरव — के रूप में गाए जाते हैं। फलश्रुति में छाप है: "कहे धरणीधर नर"।
FAQ
श्री भैरव बाबा आरती — सामान्य प्रश्न
सात — छह स्तुति-पद और एक फलश्रुति ("बटुकनाथ जी की आरती, जो कोई नर गावे")। तीनों प्रकाशित प्रतियों में सातों पद हैं।
फलश्रुति में छाप है — "कहे धरणीधर नर"। इसके अलावा रचयिता के बारे में किसी प्रकाशित प्रति में जानकारी नहीं।
बटुक भैरव — भैरव का बालक रूप। छठा पद कहता है "बटुकनाथ बन बालक, जन मन हरषावत", और फलश्रुति भी "बटुकनाथ जी की आरती" कहकर आती है।
तीन प्रकाशित प्रतियों से — नॉलेज गैलरी (आधार), आरती ज्ञान और इष्टदेव। सातों पद तीनों में हैं; जहाँ प्रतियाँ बँटती हैं, वहाँ दो प्रतियों का पाठ रखा गया।
पर्व
