श्री भैरव बाबा आरती

śrī bhairava bābā āratī

Bhairav Baba Aarti (Jai Bhairav Deva)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: पारंपरिक काल भैरव आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

भैरव बाबा (काल भैरव) भगवान शिव का उग्र रक्षक स्वरूप हैं, जिन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है। यह आरती रविवार, मंगलवार व कालाष्टमी को गाई जाती है, जिससे भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा। जय काल भैरव स्वामी, करूँ मैं तव सेवा॥

हे भैरव देव, आपकी जय हो! हे काल भैरव स्वामी, मैं आपकी सेवा करता हूँ।

श्याम वरण तन सोहे, श्वान पर असवारी। कर त्रिशूल डमरू धर, गल मुण्डन माला॥

श्याम वर्ण शरीर सुशोभित है, श्वान (कुत्ते) पर सवारी है; हाथों में त्रिशूल व डमरू तथा गले में मुण्डमाला धारण किए हुए हैं।

काशी कोतवाल कहलाओ, नगर रक्षा करते। पाप-ताप सब हरते, भय भक्तन के हरते॥

आप काशी के कोतवाल कहलाते हैं और नगर की रक्षा करते हैं; आप समस्त पाप-ताप तथा भक्तों के भय का हरण करते हैं।

दुष्ट दलन भयहारी, संकट सब टारो। शरण पड़े की रक्षा, बाबा तुम करो हमारी॥

हे दुष्टों का दमन व भय हरने वाले! हमारे सब संकट दूर कीजिए; हे बाबा, शरण में आए हुए हम सबकी रक्षा कीजिए।

भैरव बाबा की आरती, जो जन नित गावे। भय संकट सब मिटते, अभय वर पावे॥

जो भक्त नित्य भैरव बाबा की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय व संकट मिट जाते हैं और उसे अभय का वरदान मिलता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे भैरव देव, आपकी जय हो! हे काल भैरव स्वामी, मैं आपकी सेवा करता हूँ।
  2. श्याम वर्ण शरीर सुशोभित है, श्वान (कुत्ते) पर सवारी है; हाथों में त्रिशूल व डमरू तथा गले में मुण्डमाला धारण किए हुए हैं।
  3. आप काशी के कोतवाल कहलाते हैं और नगर की रक्षा करते हैं; आप समस्त पाप-ताप तथा भक्तों के भय का हरण करते हैं।
  4. हे दुष्टों का दमन व भय हरने वाले! हमारे सब संकट दूर कीजिए; हे बाबा, शरण में आए हुए हम सबकी रक्षा कीजिए।
  5. जो भक्त नित्य भैरव बाबा की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय व संकट मिट जाते हैं और उसे अभय का वरदान मिलता है।

लाभ

  • भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • संकट, तंत्र-बाधा व विघ्न का शीघ्र नाश होता है।
  • साहस, आत्मबल व निर्भयता में वृद्धि होती है।

कब करें पाठ

रविवार व मंगलवार कोकालाष्टमी पररात्रि व संध्या काल में

पाठ विधि

भैरव बाबा के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएँ, "ॐ कालभैरवाय नमः" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। रात्रि व कालाष्टमी को पूजा विशेष प्रभावी मानी जाती है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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श्री भैरव बाबा आरती — सामान्य प्रश्न

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