FAQ
श्री शिव — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति। भगवान शिव त्रिदेवों में संहार के अधिष्ठाता तथा "आशुतोष" अर्थात् शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। वे कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं और योगियों के आदि गुरु — आदियोगी — माने जाते हैं।
परंपरा के अनुसार श्री शिव का वाहन नंदी (वृषभ) है। उनकी शक्ति/संगिनी माता पार्वती मानी जाती हैं।
श्री शिव का बीज मंत्र "ॐ नमः शिवाय" है। रोमन में इसे "Om Namah Shivaya" लिखा जाता है। मंत्र-जप श्रद्धा व नियमितता पर आधारित परंपरा है।
परंपरा में श्री शिव की आराधना के लिए सोमवार विशेष माना जाता है। इस दिन व्रत, मंत्र-जप और संबंधित पाठ का विधान बताया जाता है।
श्री शिव को महादेव, शंकर, भोलेनाथ, नीलकंठ आदि नामों से भी जाना जाता है। हर नाम उनके किसी एक स्वरूप या गुण की ओर संकेत करता है।
जटाजूट में गंगा व चंद्र, गले में सर्प, त्रिशूल व डमरूधारी, शरीर पर भस्म; वाहन नंदी। परंपरा में उन्हें संहार, योग, ध्यान, कल्याण का अधिष्ठाता माना जाता है।
इस पृष्ठ पर श्री शिव से जुड़े 22 भक्ति पाठ उपलब्ध हैं — आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र सहित। हर पाठ हिन्दी, IAST और रोमन तीनों लिपियों में पढ़ा जा सकता है।
