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FAQ
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मंदिर वर्ष भर नहीं खुलता। कपाट अक्षय तृतीया के आसपास खुलते हैं और कार्तिक मास में, भाई दूज के आसपास, बंद हो जाते हैं। हर वर्ष की सही तिथियाँ श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति घोषित करती है — खुलने की तिथि महाशिवरात्रि पर और बंद होने की तिथि विजयादशमी के बाद। यात्रा की योजना बनाने से पूर्व उस वर्ष की घोषित तिथियाँ अवश्य देख लें।
कपाट बंद होने पर भगवान की चल विग्रह डोली ऊखीमठ लाई जाती है और छह माह वहीं पूजा होती है। कपाट पुनः खुलने पर डोली वापस केदारनाथ जाती है, जिससे पूजा का क्रम कभी नहीं टूटता।
निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और हरिद्वार हैं, जहाँ से गौरीकुंड लगभग 220 किमी सड़क मार्ग से है। गौरीकुंड अंतिम मोटर योग्य स्थान है; वहाँ से मंदिर तक लगभग 17 किमी की चढ़ाई है जिसमें पैदल 6 से 8 घंटे लगते हैं। घोड़ा, पालकी व डंडी की व्यवस्था रहती है, तथा फाटा व सिरसी से हेलिकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है।
हाँ, उत्तराखंड सरकार की चारधाम यात्रा पंजीकरण व्यवस्था लागू रहती है। इसकी वर्तमान प्रक्रिया यात्रा से पूर्व अवश्य देख लें, क्योंकि नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं।
परंपरा के अनुसार वृषभ रूप धारी शिव के अंग हिमालय के पाँच स्थानों पर प्रकट हुए — केदारनाथ में पृष्ठ भाग, तुंगनाथ में भुजाएँ, रुद्रनाथ में मुख, मध्यमहेश्वर में नाभि व उदर तथा कल्पेश्वर में जटाएँ। ये पाँचों मिलकर पंच केदार कहलाते हैं।
मई-जून तथा सितंबर-अक्टूबर सामान्यतः अनुकूल रहते हैं। जुलाई-अगस्त में वर्षा के कारण मार्ग जोखिमपूर्ण हो सकता है। ऊँचाई अधिक होने के कारण हृदय, श्वास या रक्तचाप की समस्या होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेकर ही यात्रा करें।
सन् 2013 की बाढ़ में क्षेत्र में भारी तबाही हुई, पर मंदिर बच गया। मंदिर के पीछे आकर अटक गई एक विशाल शिला ने जलधारा को दो भागों में बाँट दिया और मंदिर को बहने से बचा लिया।

