FAQ
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भीमाशंकर महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में खेड़ तालुका के भीमाशंकर गाँव में, सह्याद्रि की पहाड़ियों पर लगभग 934 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। पुणे से इसकी दूरी लगभग 110 किमी है।
सामान्य व्यवस्था में मंदिर सुबह 5:00 बजे से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है, बीच में पूजा के समय दर्शन बंद रहते हैं। परंतु वर्तमान में सभामंडप व सीढ़ियों के निर्माण कार्य के कारण दर्शन केवल प्रातः 7:00 से 11:00 बजे तक हो रहे हैं — यात्रा से पूर्व मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय से वर्तमान स्थिति अवश्य पूछ लें।
परंपरा के अनुसार हाँ। कथा कहती है कि त्रिपुरासुर के वध के बाद भगवान शिव के शरीर से बहे स्वेद से भीमरथी अर्थात् भीमा नदी बनी। वन में स्थित गुप्त भीमाशंकर को उद्गम स्थल माना जाता है।
निकटतम हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन पुणे है, जहाँ से भीमाशंकर लगभग 110 किमी दूर है। पुणे व मुंबई से नियमित बस सेवा उपलब्ध है। मार्ग पहाड़ी है और अंतिम कुछ किलोमीटर घुमावदार हैं।
वर्तमान मंदिर का मूल भाग 13वीं शताब्दी का माना जाता है और नागर शैली में बना है, जिसमें हेमाडपंथी स्थापत्य से साम्य है। सभामंडप का निर्माण 18वीं शताब्दी में नाना फडणवीस ने कराया।
मंदिर परिसर में शनि मंदिर के पास दो स्तंभों के बीच लटका बड़ा घंटा मूलतः वसई किले के पुर्तगाली गिरजाघरों का है। सन् 1739 में वसई की लड़ाई में विजय के बाद बाजीराव प्रथम के भाई चिमाजी अप्पा ने इसे भीमाशंकर को भेंट किया था।
यह मंदिर के पीछे स्थित कुंड है। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु दर्शन से पूर्व यहाँ स्नान करते हैं और फिर मंदिर की ओर बढ़ते हैं।
अक्टूबर से फरवरी तक मौसम अनुकूल रहता है। वर्षा ऋतु में सह्याद्रि का सौंदर्य अद्भुत होता है, पर मार्ग फिसलन भरा हो जाता है। सप्ताह के दिनों में प्रातः दर्शन सबसे शांत रहते हैं।

