यह स्थान इनमें भी है:चार धाम
FAQ
रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रामनाथस्वामी मंदिर तमिलनाडु के रामनाथपुरम ज़िले में रामेश्वरम् द्वीप पर स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे दक्षिण में है और चार धाम में भी सम्मिलित है।
परंपरा के अनुसार पूजा हेतु शिवलिंग लाने हनुमानजी कैलाश गए, पर मुहूर्त निकट आने पर माता सीता ने बालू से लिंग बना दिया — वही रामलिंग कहलाया। हनुमानजी के लौटने पर श्रीराम ने उनके लाए लिंग को विश्वलिंग के रूप में स्थापित किया और यह विधान किया कि पूजा में पहले विश्वलिंग का दर्शन होगा। यह क्रम आज भी निभाया जाता है।
मंदिर परिसर में बाईस तीर्थ (कुंड) हैं, जिन्हें परंपरा में श्रीराम के तरकश के बाईस बाणों का प्रतीक माना जाता है। इनमें क्रमशः स्नान करना रामेश्वरम् यात्रा का प्रमुख अंग है। इसके लिए अलग टिकट लेना होता है और शुल्क नाममात्र रहता है।
दर्शन सामान्यतः प्रातः 5:00 से दोपहर 1:00 तक और दोपहर 3:00 से रात्रि 9:00 तक होते हैं। समय व व्यवस्था बदलती रहती है, इसलिए यात्रा से पूर्व मंदिर प्रशासन से पुष्टि अवश्य कर लें।
यह भारत के समस्त हिंदू मंदिरों में सबसे लंबा गलियारा माना जाता है — लगभग 6.9 मीटर ऊँचा, पूर्व-पश्चिम में लगभग 400 फुट तथा उत्तर-दक्षिण में लगभग 640 फुट, जिसमें लगभग 1212 स्तंभ हैं। इसका निर्माण राजा मुथुरामलिंग सेतुपति के काल में हुआ।
रामेश्वरम् रेलवे स्टेशन द्वीप पर ही है और रेल मार्ग पंबन पुल से होकर आता है। निकटतम हवाई अड्डा मदुरै है। सड़क मार्ग से भी द्वीप पंबन पुल द्वारा मुख्य भूमि से जुड़ा है, और मदुरै व चेन्नई से बस सेवा उपलब्ध है।

