FAQ
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के खंडवा ज़िले में नर्मदा नदी के बीच स्थित मांधाता द्वीप पर है। परंपरा के अनुसार इस द्वीप का आकार ॐ जैसा है, और नाम भी इसी से बना।
दर्शन सुबह 5:00 बजे से रात 10:30 बजे तक होते हैं, पर बीच में आरती व शृंगार के समय दर्शन बंद रहते हैं — मंगल आरती (4:30–5:00), मध्याह्न भोग (12:20–1:15), सायंकालीन शृंगार (4:00–4:30) और शयन आरती (9:30–10:00)।
ओंकारेश्वर मंदिर नर्मदा के बीच द्वीप पर है और ममलेश्वर (अमलेश्वर) मंदिर नर्मदा के दक्षिण तट पर। परंपरा दोनों को एक ही ज्योतिर्लिंग के दो स्वरूप मानती है, इसलिए श्रद्धालु प्रायः दोनों के दर्शन करते हैं।
द्वीप तक पहुँचने के लिए नर्मदा पार करनी होती है — पुल से पैदल अथवा नाव द्वारा। वर्षा ऋतु में जलस्तर बढ़ने पर नाव की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
निकटतम हवाई अड्डा इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा है। रेल मार्ग से खंडवा जंक्शन तथा मऊ (डॉ. आंबेडकर नगर) निकटतम स्टेशन हैं, जहाँ से आगे सड़क मार्ग से जाना होता है।
परंपरा के अनुसार आदि शंकराचार्य की भेंट अपने गुरु गोविंद भगवत्पाद से ओंकारेश्वर की एक गुफा में हुई थी। वह गुफा आज भी शिव मंदिर के ठीक नीचे है, जहाँ आदि शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित है।
द्वीप लगभग 4 किलोमीटर लंबा है और लगभग 2.6 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। परंपरा के अनुसार इसका आकार ॐ जैसा है, और मंदिर इसी द्वीप पर स्थित है।
वर्तमान मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में परमार राजाओं के समय हुआ माना जाता है। मध्यकाल में क्षति के बाद 18वीं शताब्दी में होल्कर शासकों ने इसका पुनर्निर्माण कराया, जिसे अहिल्याबाई होल्कर ने पूर्ण किया।

