FAQ
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इसका उत्तर विवादित है। बैद्यनाथ मंदिर देवघर (झारखंड), श्री वैजनाथ मंदिर परली (महाराष्ट्र) और बैजनाथ मंदिर कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) — तीनों स्वयं को वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग बताते हैं। भारत सरकार ने किसी एक को ज्योतिर्लिंग के रूप में अधिसूचित नहीं किया है। इस पृष्ठ की जानकारी मुख्यतः देवघर धाम की है, जो इनमें सर्वाधिक दर्शनार्थियों वाला स्थान है।
परली का पक्ष द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र की पंक्ति "परल्यां वैद्यनाथं च" पर टिका है। देवघर का पक्ष इस बात पर कि शास्त्रों में वैद्यनाथ का वर्णन पूर्वोत्तर दिशा में और चिताभूमि पर मिलता है, और देवघर का प्राचीन नाम चिताभूमि रहा है। कांगड़ा का बैजनाथ मंदिर अपनी प्राचीनता व नाम के आधार पर दावा करता है।
कथा के अनुसार रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अपने सिर एक-एक कर अर्पित करने आरंभ किए। शिव ने प्रकट होकर उसके कटे सिर पुनः जोड़ दिए — एक वैद्य की तरह उसे स्वस्थ किया। इसी से उन्हें वैद्यनाथ अर्थात् वैद्यों के नाथ कहा गया।
श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में देवघर में लगने वाला महीने भर का आयोजन, जिसमें लाखों कांवड़िये बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर लगभग 105 किलोमीटर नंगे पाँव चलकर बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करते हैं। यह भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।
सामान्यतः दर्शन प्रातः 4:00 से दोपहर 3:30 तक और सायं 6:00 से रात्रि 9:00 तक होते हैं। श्रावण मास में व्यवस्था पूरी तरह बदल जाती है और दर्शन में कई घंटे लग सकते हैं। यात्रा से पूर्व वर्तमान व्यवस्था अवश्य पता कर लें।
निकटतम रेलवे स्टेशन जसीडीह जंक्शन है, जो मंदिर से लगभग 4-5 किमी दूर है; देवघर के लिए सीधी रेल सेवा भी उपलब्ध है। निकटतम हवाई अड्डा देवघर हवाई अड्डा है। झारखंड व बिहार के प्रमुख नगरों से नियमित बस सेवा भी है।

