FAQ
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा के तट पर, विश्वनाथ गली में स्थित है। इसे शिव मंदिरों में सर्वाधिक पूज्य माना जाता है।
मंदिर प्रातः 2:30 बजे खुलता है और रात्रि 11:00 बजे बंद होता है। प्रातः 11:30 से दोपहर 12:00 तक भोग आरती के समय दर्शन बंद रहते हैं। पर्व के दिनों में व्यवस्था बदलती है, इसलिए यात्रा से पूर्व आधिकारिक पोर्टल से पुष्टि कर लें।
प्रतिदिन पाँच आरतियाँ होती हैं — मंगला आरती (प्रातः 3:00–4:00), भोग आरती (प्रातः 11:30–दोपहर 12:00), सप्तऋषि आरती (सायं 7:00–8:30), शृंगार/भोग आरती (रात्रि 9:00 से) और शयन आरती (रात्रि 10:30 से)। मंगला आरती में सम्मिलित होने के लिए टिकट आवश्यक है।
यह दिसंबर 2021 में लोकार्पित परियोजना है, जिसने मंदिर को सीधे गंगा तट से जोड़ दिया। इसके बाद दर्शन-व्यवस्था और पहुँचने का मार्ग दोनों बदल गए, इसलिए 2021 से पुरानी जानकारी अब लागू नहीं होती। गलियारे में प्रवेश निःशुल्क है।
परंपरा के अनुसार काशी वह स्थान है जिसे भगवान शिव ने कभी नहीं छोड़ा और न छोड़ेंगे — इसीलिए इसे अविमुक्त कहा गया। शास्त्र यह भी कहते हैं कि प्रलय के समय शिव काशी को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं।
वर्तमान मंदिर का निर्माण सन् 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया। सन् 1835 में महाराजा रणजीत सिंह ने शिखर के स्वर्ण-मंडन हेतु लगभग एक टन स्वर्ण भेंट किया।
सामान्य दर्शन निःशुल्क है। सुगम दर्शन तथा आरती में सम्मिलित होने के लिए बुकिंग करनी होती है, जो केवल आधिकारिक पोर्टल shrikashivishwanath.org से ही की जानी चाहिए — कोई अन्य वेबसाइट अधिकृत नहीं है।

