श्री केदारनाथ आरती
śrī kedāranātha āratī
Kedarnath Aarti (Kedarnath Dham)
परिचय
महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।
स्रोत: श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड)
उद्भव / पृष्ठभूमि
श्री केदारनाथ भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग-स्वरूप हैं, जो हिमालय में मन्दाकिनी नदी के उद्गम के निकट केदारनाथ धाम (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड) में विराजमान हैं। यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों व छोटा चारधाम में प्रमुख तीर्थ है, जहाँ शिव त्रिकोण-लिंग रूप में पूजित हैं।
आरती (लिरिक्स)
जय केदार उदार शंकर, हिमगिरि में राजे। ज्योतिर्लिंग स्वरूप तुम्हारा, त्रिभुवन में साजे॥
हे उदार शंकर केदारनाथ, आपकी जय हो! हिमालय में विराजमान आपका ज्योतिर्लिंग स्वरूप तीनों लोकों में सुशोभित है।
मन्दाकिनी तट पावन, बर्फीली वादी। पंच केदारों में प्रमुख, महिमा अति न्यारी॥
पावन मन्दाकिनी का तट व बर्फीली घाटी; पंच केदारों में प्रमुख आपकी महिमा अति अनुपम है।
जल-बेलपत्र अर्पित, भक्त करें पूजा। हर-हर महादेव कहकर, ध्यावें नहिं दूजा॥
भक्त जल व बेलपत्र अर्पित कर पूजा करते हैं; "हर-हर महादेव" कहकर वे आप ही का ध्यान करते हैं, किसी अन्य का नहीं।
पाप-ताप सब हरते, मोक्ष-पद दिलाते। जो जन तेरे दर आए, भव-पार लगाते॥
आप समस्त पाप-ताप हरते हैं और मोक्ष-पद दिलाते हैं; जो भी आपके द्वार आता है, उसे भवसागर से पार लगाते हैं।
केदारनाथ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। पाप-ताप सब मिटते, शिव-कृपा पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से केदारनाथ की यह आरती गाता है, उसके समस्त पाप-ताप मिट जाते हैं और वह शिव-कृपा प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे उदार शंकर केदारनाथ, आपकी जय हो! हिमालय में विराजमान आपका ज्योतिर्लिंग स्वरूप तीनों लोकों में सुशोभित है।
- पावन मन्दाकिनी का तट व बर्फीली घाटी; पंच केदारों में प्रमुख आपकी महिमा अति अनुपम है।
- भक्त जल व बेलपत्र अर्पित कर पूजा करते हैं; "हर-हर महादेव" कहकर वे आप ही का ध्यान करते हैं, किसी अन्य का नहीं।
- आप समस्त पाप-ताप हरते हैं और मोक्ष-पद दिलाते हैं; जो भी आपके द्वार आता है, उसे भवसागर से पार लगाते हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से केदारनाथ की यह आरती गाता है, उसके समस्त पाप-ताप मिट जाते हैं और वह शिव-कृपा प्राप्त करता है।
लाभ
- पापों का नाश होकर मन निर्मल होता है।
- मोक्ष-मार्ग प्रशस्त होकर आध्यात्मिक उन्नति होती है।
- भय व संकट से रक्षा होकर शिव-कृपा प्राप्त होती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
श्री केदारनाथ (शिवलिंग) पर जल व बेलपत्र अर्पित करें, "ॐ नमः शिवाय" व "हर-हर महादेव" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। केदारनाथ धाम के कपाट-दर्शन व श्रावण में विशेष फलदायी।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
श्री शिव
Lord Shiva
महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।
