श्री केदारनाथ आरती

śrī kedāranātha āratī

Kedarnath Aarti (Jai Kedar Udar Shankar)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
महाशिवरात्रि; केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर; सोमवार
उद्देश्य:मोक्ष (Liberation)पाप-नाश (Removal of sins)तीर्थ-पुण्य (Merit of pilgrimage)
✓ संपूर्ण

"जय केदार उदार शंकर, भव भयंकर दु:ख हरम्" केदारनाथ की आरती है, जिसके हर पद का अंत "जय केदार नमाम्यहम्" पर होता है। इसके सात पद केदारनाथ धाम का दृश्य रचते हैं — हिमालय, मंदाकिनी, कुंड, पांडव और द्रौपदी — और पंच केदार का भी उल्लेख करते हैं।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: "जय केदार उदार शंकर" — केदारनाथ की परंपरागत आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री केदारनाथ आरती
IASTśrī kedāranātha āratī
देवताश्री शिव
मूल स्रोत"जय केदार उदार शंकर" — केदारनाथ की परंपरागत आरती
शुभ दिनमहाशिवरात्रि; केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर; सोमवार
पाठ समय3 मिनट
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती केदारनाथ धाम की यात्रा जैसी है — पहले धाम, फिर वहाँ के कुंड, फिर शिव का रूप, और अंत में पंच केदार।

धाम (पद 1–2). गौरी, गणपति, स्कंद और नंदी के साथ केदार; "शैल सुन्दर अति हिमालय, शुभ्र मन्दिर सुन्दरम्; निकट मंदाकिनी सरस्वती" — अति सुंदर हिमालय, उजला मंदिर, और पास बहती मंदाकिनी।

कुंड (पद 3). "उदक कुण्ड है अधम पावन, रेतस कुण्ड मनोहरम्; हंस कुंड समीप सुन्दर" — धाम के तीन कुंड: पापियों को भी पावन करने वाला उदक कुंड, मनोहर रेतस कुंड और पास का सुंदर हंस कुंड।

पांडव (पद 4). अन्नपूर्णा, अपर्णा और काल भैरव के साथ, "पांच पांडव द्रोपदी सह" — पाँच पांडव और द्रौपदी भी यहाँ पूजे जाते हैं।

पंच केदार (पद 6–7). "मध्य महेश्वर तुंग ईश्वर, रुद्र कल्प महेश्वरम्" — केदारनाथ के साथ मध्यमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर; और "पंच धन्य विशाल आलय" — ये पाँच धन्य, विशाल धाम।

आरती (लिरिक्स)

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जय केदार उदार शंकर, भव भयंकर दु:ख हरम्। गौरी, गणपति, स्कन्द, नन्दी, श्री केदार नमाम्यहम्॥

हे उदार शंकर केदार, आपकी जय हो — आप संसार के भयंकर दुख हरने वाले हैं; गौरी, गणपति, स्कंद और नंदी के साथ (विराजमान) श्री केदार को मैं नमन करता हूँ।

शैल सुन्दर अति हिमालय, शुभ्र मन्दिर सुन्दरम्। निकट मंदाकिनी सरस्वती, जय केदार नमाम्यहम्॥

अत्यंत सुंदर हिमालय पर्वत है, उजला सुंदर मंदिर है; पास में मंदाकिनी और सरस्वती (बहती) हैं — जय केदार, मैं आपको नमन करता हूँ।

उदक कुण्ड है अधम पावन, रेतस कुण्ड मनोहरम्। हंस कुंड समीप सुन्दर, जै केदार नमाम्यहम्॥

उदक कुंड अधम (पापी) को भी पावन करने वाला है, रेतस कुंड मनोहर है, और पास का हंस कुंड सुंदर है — जय केदार, मैं आपको नमन करता हूँ।

अन्नपूर्णा सह अपर्णा, काल भैरव शोभितम्। पांच पांडव द्रोपदी सह, जय केदार नमाम्यहम्॥

अन्नपूर्णा और अपर्णा (पार्वती) के साथ, काल भैरव से शोभित; पाँच पांडव और द्रौपदी के साथ (पूजित) — जय केदार, मैं आपको नमन करता हूँ।

शिव दिगम्बर भस्मधारी, अर्द्ध चन्द्र विभूषितम्। शीश गंगा कंठ फणिपति, जै केदार नमाम्यहम्॥

दिगंबर, भस्म धारण करने वाले शिव, अर्धचंद्र से विभूषित; सिर पर गंगा और कंठ में नागराज — जय केदार, मैं आपको नमन करता हूँ।

कर त्रिशूल विशाल डमरू, ज्ञान गान विशारदम्। मध्य महेश्वर तुंग ईश्वर, रुद्र कल्प महेश्वरम्॥

हाथ में त्रिशूल और विशाल डमरू, ज्ञान और गान में निपुण; (और आप ही) मध्यमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर (के रूप में) महेश्वर हैं।

पंच धन्य विशाल आलय, जै केदार नमाम्यहम्। नाथ पावन हे विशालम्, पुण्यप्रद हर दर्शनम्॥

(ये) पाँच धन्य, विशाल धाम हैं — जय केदार, मैं आपको नमन करता हूँ; हे नाथ, आप पावन और विशाल हैं — हर (शिव) का दर्शन पुण्य देने वाला है।

जय केदार उदार शंकर, पाप ताप नमाम्यहम्॥

(समापन) हे उदार शंकर केदार, आपकी जय हो — पाप और ताप (हरने वाले आपको) मैं नमन करता हूँ।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे उदार शंकर केदार, आपकी जय हो — आप संसार के भयंकर दुख हरने वाले हैं; गौरी, गणपति, स्कंद और नंदी के साथ (विराजमान) श्री केदार को मैं नमन करता हूँ।
  2. अत्यंत सुंदर हिमालय पर्वत है, उजला सुंदर मंदिर है; पास में मंदाकिनी और सरस्वती (बहती) हैं — जय केदार, मैं आपको नमन करता हूँ।
  3. उदक कुंड अधम (पापी) को भी पावन करने वाला है, रेतस कुंड मनोहर है, और पास का हंस कुंड सुंदर है — जय केदार, मैं आपको नमन करता हूँ।
  4. अन्नपूर्णा और अपर्णा (पार्वती) के साथ, काल भैरव से शोभित; पाँच पांडव और द्रौपदी के साथ (पूजित) — जय केदार, मैं आपको नमन करता हूँ।
  5. दिगंबर, भस्म धारण करने वाले शिव, अर्धचंद्र से विभूषित; सिर पर गंगा और कंठ में नागराज — जय केदार, मैं आपको नमन करता हूँ।
  6. हाथ में त्रिशूल और विशाल डमरू, ज्ञान और गान में निपुण; (और आप ही) मध्यमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर (के रूप में) महेश्वर हैं।
  7. (ये) पाँच धन्य, विशाल धाम हैं — जय केदार, मैं आपको नमन करता हूँ; हे नाथ, आप पावन और विशाल हैं — हर (शिव) का दर्शन पुण्य देने वाला है।
  8. (समापन) हे उदार शंकर केदार, आपकी जय हो — पाप और ताप (हरने वाले आपको) मैं नमन करता हूँ।

लाभ

  • केदारनाथ धाम का ध्यान — आरती धाम का पूरा दृश्य रचती है।
  • पंच केदार का स्मरण (पद 6–7)।
  • पाप और ताप से मुक्ति की प्रार्थना — "पाप ताप नमाम्यहम्"।

कब करें पाठ

महाशिवरात्रि परकेदारनाथ यात्रा के समय या उसका ध्यान करते हुएसोमवार को

पाठ विधि

शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करके दीपक जलाएँ और आरती गाएँ। हर पद "जय केदार नमाम्यहम्" पर समाप्त होता है, और आरती "जय केदार उदार शंकर, पाप ताप नमाम्यहम्" पर पूरी होती है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराkavitakosh.org — जय केदार उदार शंकर / आरती (आधार-पाठ) · hindi.webdunia.com — श्री केदारनाथजी की आरती
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
संबंधित ज्योतिर्लिंग
सभी पाठ देखें

श्री केदारनाथ आरती — सामान्य प्रश्न

श्री शिव भक्ति संग्रह

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