समय
1–2 मिनट
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
सोमवार व प्रदोष
उद्देश्य:स्वास्थ्य (Health)रक्षा (Protection)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण वैदिक मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र एक वैदिक मंत्र है — ऋग्वेद (7.59.12) — त्र्यम्बकं यजामहे (ऋषि वशिष्ठ)। हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते हैं, जो सुगंधमय और पोषण को बढ़ाने वाले हैं। परंपरा में इसे मुख्यतः स्वास्थ्य, रक्षा, आध्यात्मिक उन्नति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
महामृत्युंजय मंत्र — सामान्य प्रश्न
यह भगवान शिव (त्र्यम्बक) का मंत्र है और ऋग्वेद से लिया गया है। इसे "मृत्यु को जीतने वाला" महामंत्र कहा जाता है।
इसके नियमित जप से रोग, भय व अकाल मृत्यु का भय दूर होता है तथा आरोग्य, दीर्घायु व मानसिक शांति प्राप्त होती है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः ब्रह्म मुहूर्त व प्रदोष काल है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — त्र्यम्बकम् — तीन नेत्रों वाले (शिव); यजामहे — हम पूजते/आराधना करते हैं; सुगन्धिम् — सुगंधमय, सुवासित; पुष्टिवर्धनम् — पोषण व बल बढ़ाने वाले; उर्वारुकम् इव — ककड़ी के समान; बन्धनात् — बंधन से; मृत्योः — मृत्यु से; मुक्षीय — मुक्त हों; मा अमृतात् — अमरत्व (मोक्ष) से नहीं (वंचित न हों)। पूरे मंत्र का भाव यह है: हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते हैं, जो सुगंधमय और पोषण को बढ़ाने वाले हैं। जैसे पकी हुई ककड़ी सहज ही बेल के बंधन से अलग हो जाती है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, परंतु अमरत्व (मोक्ष) से नहीं।
यह वैदिक मंत्र है, जिसमें स्वर तथा छंद का भी विधान होता है। परंपरा में ऐसे मंत्रों को गुरु के मुख से शुद्ध उच्चारण सहित सीखना श्रेष्ठ कहा जाता है। श्रद्धापूर्वक श्रवण तथा भावपूर्ण पाठ पर रोक नहीं बताई जाती।
"त्र्यम्बकं" का उच्चारण "त्रि-यम्-ब-कम्" के मेल से होता है। "मृत्योर्" में "मृ" का स्पष्ट उच्चारण करें। "माऽमृतात्" में अवग्रह (ऽ) पर हल्का विराम लेकर "मा-अमृतात्" बोलें। मंत्र को गंभीर व सम स्वर में बोलें। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
पर्व
