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लिपि:
॥ श्री ॥
महामृत्युंजय मंत्र
मंत्र · श्री शिव
पाठ
1
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
अर्थ (हिन्दी)
- हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते हैं, जो सुगंधमय और पोषण को बढ़ाने वाले हैं। जैसे पकी हुई ककड़ी सहज ही बेल के बंधन से अलग हो जाती है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, परंतु अमरत्व (मोक्ष) से नहीं।
लाभ
- रोग, भय और अकाल मृत्यु के भय का नाश होता है।
- दीर्घायु, आरोग्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
- नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।
कब करें पाठ
सोमवार व प्रदोष काल में · प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में · रोग या संकट के समय
स्रोत
रचयिता: ऋषि वशिष्ठ. ऋग्वेद 7.59.12 · यजुर्वेद परंपरा
