ॐ नमः शिवाय

oṃ namaḥ śivāya

Om Namah Shivaya (Panchakshari Mantra)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार व प्रदोष
उद्देश्य:आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण वैदिक मंत्र

ॐ नमः शिवाय एक वैदिक मंत्र है — यजुर्वेद — श्री रुद्रम् (पंचाक्षरी मंत्र)। मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ। परंपरा में इसे मुख्यतः आध्यात्मिक उन्नति, मन की शांति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: यजुर्वेद — श्री रुद्रम् (पंचाक्षरी मंत्र)

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ नमः शिवाय
IASToṃ namaḥ śivāya
प्रकारवैदिक मंत्र (मूल मंत्र भी)
देवताश्री शिव
मूल स्रोतयजुर्वेद — श्री रुद्रम् (पंचाक्षरी मंत्र)
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनसोमवार व प्रदोष
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

ॐ नमः शिवाय यजुर्वेद — श्री रुद्रम् (पंचाक्षरी मंत्र) के रूप में जाना जाता है। मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ। यह पंचाक्षरी (पाँच अक्षर — न, मः, शि, वा, य) महामंत्र शिव के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: ॐ — प्रणव — परब्रह्म का प्रतीक; नमः — नमस्कार, समर्पण; शिवाय — शिव को (कल्याणकारी को)। इन्हीं पदों के मेल से पूरे मंत्र का भाव बनता है, इसलिए जप करते समय इनका स्मरण रखना उपयोगी कहा जाता है।

यह वैदिक मंत्र है। वैदिक मंत्रों में स्वर का भी विधान होता है, इसलिए परंपरा में इन्हें गुरु के मुख से सीखना श्रेष्ठ कहा जाता है।

परंपरा में इसका जप 108 बार — एक माला — कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष माला बताई जाती है। इसके लिए सोमवार व प्रदोष विशेष कहे जाते हैं। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि संख्या से अधिक महत्व नियमितता का है।

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मंत्र

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ॐ नमः शिवाय॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ नमः शिवाय॥

oṃ namaḥ śivāya ||

Om Namah Shivaya.

उच्चारण मार्गदर्शन: "ॐ" दीर्घ (ओ…म्), फिर "न-मः" (विसर्ग ह् की हल्की ध्वनि के साथ), तत्पश्चात "शि-वा-य"। पूरे मंत्र को मधुर व लयबद्ध स्वर में दोहराएँ।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
नमःनमस्कार, समर्पण
शिवायशिव को (कल्याणकारी को)

अर्थ (हिन्दी)

  1. मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ। यह पंचाक्षरी (पाँच अक्षर — न, मः, शि, वा, य) महामंत्र शिव के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

लाभ

  • मन को गहरी शांति और स्थिरता मिलती है।
  • भय व चिंता दूर होकर आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • किसी भी समय, कहीं भी सरलता से जप किया जा सकता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: प्रातः, संध्या व ध्यान के समय

जप का उत्तम समय

प्रातः व संध्यासोमवार व प्रदोष काल मेंध्यान के समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शांत स्थान पर सुखासन में बैठें, नेत्र बंद कर श्वास पर ध्यान रखते हुए रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय भी इसका उच्चारण शुभ है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरायजुर्वेद — श्री रुद्रम् · पारंपरिक शैव परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
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मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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