ॐ मृत्युञ्जय महादेव — शिव साधना मंत्र

oṃ mṛtyuñjaya mahādeva

Mrityunjaya Mahadeva Mantra

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार, प्रदोष व महाशिवरात्रि
उद्देश्य:आरोग्य व दीर्घायु (Health)रक्षा (Protection)संकट मोचन (Relief from Crisis)
✓ संपूर्ण साधना मंत्र

ॐ मृत्युञ्जय महादेव त्राहि मां शरणागतम् — यह शिव का साधना मंत्र है, जिसमें साधक जन्म, मृत्यु, जरा, रोग और कर्म-बंधन से पीड़ित होकर शरण माँगता है। यह महामृत्युञ्जय स्तोत्रम् का श्लोक है और ऋग्वेद वाली “त्र्यम्बकं यजामहे” ऋचा से भिन्न है।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: महामृत्युञ्जय स्तोत्रम् का श्लोक; शिव साधना में स्वतंत्र प्रार्थना-मंत्र

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ मृत्युञ्जय महादेव — शिव साधना मंत्र
IASToṃ mṛtyuñjaya mahādeva
प्रकारसाधना मंत्र
देवताश्री शिव
मूल स्रोतमहामृत्युञ्जय स्तोत्रम् का श्लोक; शिव साधना में स्वतंत्र प्रार्थना-मंत्र
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनसोमवार, प्रदोष व महाशिवरात्रि
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह श्लोक महामृत्युञ्जय स्तोत्रम् — जिसे "रुद्रं पशुपतिम्" स्तोत्र भी कहा जाता है — का अंश है, और शिव-साधना में स्वतंत्र प्रार्थना-मंत्र के रूप में भी पढ़ा जाता है।

भाव अत्यंत सीधा और मार्मिक है। साधक कोई वरदान नहीं माँगता, केवल शरण माँगता है: "हे मृत्यु को जीतने वाले महादेव, मेरी रक्षा कीजिए — मैं आपकी शरण में हूँ। मैं जन्म, मृत्यु, जरा और रोग से पीड़ित हूँ, और कर्म-बंधनों में जकड़ा हूँ।" यहाँ पाँच पीड़ाएँ गिनाई गई हैं और वे मनुष्य-जीवन की मूल पीड़ाएँ मानी जाती हैं।

एक भ्रम यहाँ बहुत आम है, इसलिए स्पष्ट कर देना उचित है: यह महामृत्युंजय मंत्र नहीं है। महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद 7.59.12 की "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्…" ऋचा है — एक वैदिक मंत्र। यह उससे भिन्न, परवर्ती स्तोत्र-श्लोक है। नाम की समानता के कारण दोनों को एक मान लेना सामान्य भूल है; इस संग्रह में दोनों के अलग पृष्ठ हैं।

मंत्र

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ॐ मृत्युञ्जय महादेव त्राहि मां शरणागतम्। जन्ममृत्युजरारोगैः पीडितं कर्मबन्धनैः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ मृत्युञ्जय महादेव त्राहि मां शरणागतम्। जन्ममृत्युजरारोगैः पीडितं कर्मबन्धनैः॥

oṃ mṛtyuñjaya mahādeva trāhi māṃ śaraṇāgatam | janmamṛtyujarārogaiḥ pīḍitaṃ karmabandhanaiḥ ||

Om Mrityunjaya Mahadeva Trahi Mam Sharanagatam, Janma-mrityu-jara-rogaih Piditam Karma-bandhanaih.

उच्चारण मार्गदर्शन: "मृत्युञ्जय" में ऋ-कार और "ञ्ज" संयुक्ताक्षर दोनों हैं — इसे "मृत्युंजय" (अनुस्वार सहित) लिखना भी प्रचलित है और उच्चारण एक ही है। "त्राहि" में "त्र" संयुक्ताक्षर स्पष्ट हो। "जन्ममृत्युजरारोगैः" इस श्लोक का सबसे लंबा पद है — इसे "जन्म-मृत्यु-जरा-रोगैः" चार अंशों में तोड़कर अभ्यास करें; ये चार अलग पीड़ाएँ हैं। स्वर विनम्र व प्रार्थना-भाव का रखें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

मृत्युञ्जयमृत्यु को जीतने वाले
महादेवहे महादेव
त्राहि माम्मेरी रक्षा कीजिए
शरणागतम्शरण में आए हुए को
जन्मजन्म
मृत्युमृत्यु
जराबुढ़ापा
रोगैःरोगों से
पीडितम्पीड़ित
कर्मबन्धनैःकर्म के बंधनों से

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे मृत्यु को जीतने वाले महादेव, मेरी रक्षा कीजिए — मैं आपकी शरण में आया हूँ। मैं जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा और रोग से पीड़ित हूँ, तथा कर्म-बंधनों में जकड़ा हुआ हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे आरोग्य, दीर्घायु व रोग-निवृत्ति की प्रार्थना से जोड़ा जाता है।
  • शरणागति-भाव जगाने वाला मंत्र माना जाता है — यहाँ वरदान नहीं, शरण माँगी जाती है।
  • रोग या संकट के समय स्वयं व परिजन के लिए पाठ प्रचलित है।
  • महामृत्युंजय जप के साथ पूरक प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: प्रातः व प्रदोष काल

जप का उत्तम समय

सोमवार व प्रदोष काल मेंमहाशिवरात्रि पररोग, शल्य-चिकित्सा या संकट के समयमहामृत्युंजय जप के आरंभ या समापन पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र अर्पित कर, हाथ जोड़कर 11 या 108 बार इस श्लोक का पाठ करें। परंपरा में इसे महामृत्युंजय जप के साथ पूरक प्रार्थना के रूप में पढ़ने की बात कही जाती है। रोगी के कल्याण हेतु पाठ करना हो तो उसका नाम-संकल्प लेकर आरंभ करने की परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
मूल ग्रंथमहामृत्युञ्जय स्तोत्रम् (रुद्रं पशुपतिम्)
स्रोत परंपरामहामृत्युञ्जय स्तोत्रम् ("रुद्रं पशुपतिम्") — यह श्लोक उसी स्तोत्र का अंश है · शिव मंत्र-सूची में स्वतंत्र प्रविष्टि "Mrityunjaya Mahadeva Mantra" (drikpanchang)
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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