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लिपि:
॥ श्री ॥

ॐ मृत्युञ्जय महादेव — शिव साधना मंत्र

मंत्र · श्री शिव

पाठ

1

ॐ मृत्युञ्जय महादेव त्राहि मां शरणागतम्। जन्ममृत्युजरारोगैः पीडितं कर्मबन्धनैः॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे मृत्यु को जीतने वाले महादेव, मेरी रक्षा कीजिए — मैं आपकी शरण में आया हूँ। मैं जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा और रोग से पीड़ित हूँ, तथा कर्म-बंधनों में जकड़ा हुआ हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे आरोग्य, दीर्घायु व रोग-निवृत्ति की प्रार्थना से जोड़ा जाता है।
  • शरणागति-भाव जगाने वाला मंत्र माना जाता है — यहाँ वरदान नहीं, शरण माँगी जाती है।
  • रोग या संकट के समय स्वयं व परिजन के लिए पाठ प्रचलित है।
  • महामृत्युंजय जप के साथ पूरक प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है।

कब करें पाठ

सोमवार व प्रदोष काल में · महाशिवरात्रि पर · रोग, शल्य-चिकित्सा या संकट के समय · महामृत्युंजय जप के आरंभ या समापन पर

स्रोत

महामृत्युञ्जय स्तोत्रम् ("रुद्रं पशुपतिम्") — यह श्लोक उसी स्तोत्र का अंश है · शिव मंत्र-सूची में स्वतंत्र प्रविष्टि "Mrityunjaya Mahadeva Mantra" (drikpanchang)

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