श्री केदारनाथ चालीसा
śrī kedāranātha cālīsā
Kedarnath Chalisa (Kedarnath, Uttarakhand)
परिचय
महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।
स्रोत: केदारनाथ ज्योतिर्लिंग, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड)
संपूर्ण चालीसा
श्री गणेश गिरिजा-सुवन, सुमिर हृदय धरि ध्यान। केदारनाथ चालीसा कहूँ, करहु भक्त कल्याण॥
गिरिजा-पुत्र गणेश का स्मरण कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं केदारनाथ चालीसा कहता हूँ; हे प्रभु, भक्तों का कल्याण कीजिए।
जय केदारनाथ शिव शंकर। हिमगिरि-वासी भव-भय-हर॥
हे केदारनाथ शिव शंकर, आपकी जय हो; हिमालय में निवास करने वाले आप भव-भय हरने वाले हैं।
ज्योतिर्लिंग केदार कहाये। हिमगिरि-शिखर पर बस जाये॥
आप केदार ज्योतिर्लिंग कहलाते हैं और हिमालय के शिखर पर बसते हैं।
मन्दाकिनी-तट छवि सुहाये। भक्त-गण नित दरस को धाये॥
मन्दाकिनी नदी के तट पर आपकी छवि सुहावनी है; भक्तगण नित्य दर्शन को दौड़े आते हैं।
पाण्डव-निर्मित मन्दिर प्यारा। बैल-पीठ रूप दरस तुम्हारा॥
पाण्डवों द्वारा निर्मित यह मन्दिर प्यारा है; बैल की पीठ (पृष्ठ) रूप में आपके दर्शन होते हैं।
पाण्डवन को दरस दिया तुम। पाप-मुक्ति का मार्ग दिया तुम॥
आपने पाण्डवों को दर्शन दिया और उन्हें पाप-मुक्ति का मार्ग दिया।
जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-मृत्यु से मुक्ति पावै॥
जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व मृत्यु-भय से मुक्ति पाता है।
चार-धाम में प्रमुख कहाये। केदार-दरस जो जन पाये॥
आप चार-धाम में प्रमुख कहलाते हैं; जो जन केदार-दर्शन पाता है, वह धन्य हो जाता है।
केदार-धाम सुहावन तेरा। भक्त-गण नित दरस को घेरा॥
केदार-धाम आपका सुहावना स्थान है; भक्तगण नित्य दर्शन को आते हैं।
जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥
जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
महाशिवरात्रि व्रत जो धारे। सकल मनोरथ प्रभु ते सारे॥
जो महाशिवरात्रि का व्रत धारण करता है, प्रभु उसके समस्त मनोरथ पूर्ण करते हैं।
दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥
आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
जल-बेलपत्र अर्पित जो करते। शिव-कृपा वे सब घर भरते॥
जो जल व बेलपत्र अर्पित करते हैं, वे शिव-कृपा से घर भरते हैं।
रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥
आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
जो नर निशदिन ध्यान लगावै। केदार-कृपा सहज वह पावै॥
जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही केदार-कृपा प्राप्त करता है।
मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥
आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
पंच-केदार में तुम प्रधाना। हिमगिरि-शिखर तुम्हीं विधाना॥
पंच-केदार में आप प्रधान हैं; हिमालय के शिखर पर आप ही विराजमान हैं।
जो श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥
जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
जो यह केदार चालीसा गावै। भय-मृत्यु से छुटकारा पावै॥
जो यह केदारनाथ चालीसा गाता है, वह भय व मृत्यु-भय से छुटकारा पाता है।
नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा केदार की होई॥
जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर केदारनाथ की कृपा होती है।
मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥
सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
केदार-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥
जिन पर केदारनाथ की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
भांग-धतूरा भोग लगावैं। श्रद्धा से प्रभु को रिझावैं॥
भक्त भांग-धतूरा का भोग लगाते हैं और श्रद्धा से प्रभु को रिझाते हैं।
जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत केदार देवा॥
जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर केदार देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥
आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
महिमा तुम्हरी अति अपारा। वेद-पुराण करत विस्तारा॥
आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
काल-भय से तुम रखवाले। हर लेते सब विपदा-जाले॥
आप काल के भय से रक्षा करते हैं और विपत्तियों के जाल को हर लेते हैं।
घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥
घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥
जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
केदार-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥
जो जन केदार-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
केदार-धाम की महिमा भारी। भव-तारण तुम जग-हितकारी॥
केदार-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
मृत्यु-भय का नाश कराते। मोक्ष-मार्ग जग को दिखलाते॥
आप मृत्यु-भय का नाश करते हैं और जगत को मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।
हिमगिरि-वासी तुम कल्याणी। भव-तारण तुम सुख-दानी॥
आप हिमालय-वासी कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
जो जन केदार गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥
जो जन केदारनाथ के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
केदार-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥
जो जन केदार-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
सुख-शान्ति-आरोग्य घर में आवै। भक्ति-निर्भयता सब बढ़ावै॥
घर में सुख, शांति व आरोग्य आता है और भक्ति व निर्भयता बढ़ती है।
भय-संकट सब दूर हटावै। केदार जो जन नित ध्यावै॥
जो जन केदारनाथ का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
मोक्ष-मार्ग वह सहज वह पावै। केदार-नाम जो जन गावै॥
जो जन केदार-नाम गाता है, वह सहज ही मोक्ष-मार्ग पा लेता है।
शिव-कृपा-सुख घर में लावै। भक्ति-शान्ति सब बढ़ावै॥
घर में शिव-कृपा व सुख आता है और भक्ति व शांति बढ़ती है।
जय जय जय केदार भयहारी। रक्षा करो प्रभु शरण हमारी॥
हे भय हरने वाले केदारनाथ, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
केदार चालीसा सरल, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-मृत्यु-संकट सब, दूर हो शिव-कृपा पाय॥
जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल केदारनाथ चालीसा पढ़ता है, उसके भय, मृत्यु-भय व संकट दूर होते हैं और शिव-कृपा प्राप्त होती है।
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अर्थ (हिन्दी)
- गिरिजा-पुत्र गणेश का स्मरण कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं केदारनाथ चालीसा कहता हूँ; हे प्रभु, भक्तों का कल्याण कीजिए।
- हे केदारनाथ शिव शंकर, आपकी जय हो; हिमालय में निवास करने वाले आप भव-भय हरने वाले हैं।
- आप केदार ज्योतिर्लिंग कहलाते हैं और हिमालय के शिखर पर बसते हैं।
- मन्दाकिनी नदी के तट पर आपकी छवि सुहावनी है; भक्तगण नित्य दर्शन को दौड़े आते हैं।
- पाण्डवों द्वारा निर्मित यह मन्दिर प्यारा है; बैल की पीठ (पृष्ठ) रूप में आपके दर्शन होते हैं।
- आपने पाण्डवों को दर्शन दिया और उन्हें पाप-मुक्ति का मार्ग दिया।
- जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व मृत्यु-भय से मुक्ति पाता है।
- आप चार-धाम में प्रमुख कहलाते हैं; जो जन केदार-दर्शन पाता है, वह धन्य हो जाता है।
- केदार-धाम आपका सुहावना स्थान है; भक्तगण नित्य दर्शन को आते हैं।
- जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
- जो महाशिवरात्रि का व्रत धारण करता है, प्रभु उसके समस्त मनोरथ पूर्ण करते हैं।
- आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
- जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- जो जल व बेलपत्र अर्पित करते हैं, वे शिव-कृपा से घर भरते हैं।
- आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही केदार-कृपा प्राप्त करता है।
- आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
- पंच-केदार में आप प्रधान हैं; हिमालय के शिखर पर आप ही विराजमान हैं।
- जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
- जो यह केदारनाथ चालीसा गाता है, वह भय व मृत्यु-भय से छुटकारा पाता है।
- जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर केदारनाथ की कृपा होती है।
- सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जिन पर केदारनाथ की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
- भक्त भांग-धतूरा का भोग लगाते हैं और श्रद्धा से प्रभु को रिझाते हैं।
- जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर केदार देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
- आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
- आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
- आप काल के भय से रक्षा करते हैं और विपत्तियों के जाल को हर लेते हैं।
- घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
- जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
- जो जन केदार-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
- केदार-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
- आप मृत्यु-भय का नाश करते हैं और जगत को मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।
- आप हिमालय-वासी कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
- जो जन केदारनाथ के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
- जो जन केदार-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
- घर में सुख, शांति व आरोग्य आता है और भक्ति व निर्भयता बढ़ती है।
- जो जन केदारनाथ का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
- जो जन केदार-नाम गाता है, वह सहज ही मोक्ष-मार्ग पा लेता है।
- घर में शिव-कृपा व सुख आता है और भक्ति व शांति बढ़ती है।
- हे भय हरने वाले केदारनाथ, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
- जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल केदारनाथ चालीसा पढ़ता है, उसके भय, मृत्यु-भय व संकट दूर होते हैं और शिव-कृपा प्राप्त होती है।
लाभ
- मृत्यु-भय व पापों से मुक्ति होकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
- रोग, संकट व नकारात्मकता का नाश होता है।
- मन को शांति, निर्भयता व शिव-कृपा प्राप्त होती है।
- चार-धाम यात्रा व शिव-दर्शन का संकल्प सिद्ध होता है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
भगवान केदारनाथ (शिवलिंग) पर जल, बेलपत्र अर्पित करें, "ॐ नमः शिवाय" व "जय केदार" का स्मरण करते हुए चालीसा का पाठ करें। श्रावण व महाशिवरात्रि पर विशेष फलदायी।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
श्री शिव
Lord Shiva
महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।
