श्री महाकाल आरती
śrī mahākāla āratī
Mahakal Aarti (Mahakaleshwar, Ujjain)
परिचय
महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।
स्रोत: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन (मध्य प्रदेश)
उद्भव / पृष्ठभूमि
श्री महाकालेश्वर भगवान शिव का उग्र कालस्वरूप हैं, जो द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के रूप में उज्जैन (मध्य प्रदेश) में विराजमान हैं। यहाँ प्रातः की प्रसिद्ध "भस्म आरती" विश्व-विख्यात है। महाशिवरात्रि व श्रावण मास में यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।
आरती (लिरिक्स)
जय महाकाल भगवन्, जय अवंतिका नाथा। भस्म-रमे तन शोभे, त्रिशूल-डमरू हाथा॥
हे महाकाल भगवान, हे अवंतिका (उज्जैन) के नाथ, आपकी जय हो! भस्म रमे शरीर पर शोभा देती है तथा हाथों में त्रिशूल व डमरू सुशोभित हैं।
दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग, उज्जैन में राजे। काल के भी तुम काल, महाकाल विराजे॥
दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग रूप में आप उज्जैन में सुशोभित हैं; आप काल के भी काल हैं, इसी से "महाकाल" रूप में विराजमान हैं।
प्रातः भस्म आरती, जग में अति प्यारी। दर्शन कर भक्तन के, मिटती दुख-भारी॥
प्रातः की भस्म आरती समस्त जगत में अति प्रिय है; आपके दर्शन से भक्तों के भारी दुःख मिट जाते हैं।
अकाल मृत्यु से रक्षा, भय-संकट टारो। शरण पड़े की रक्षा, महाकाल हमारी॥
अकाल मृत्यु से रक्षा कीजिए, हमारे भय-संकट दूर कीजिए; हे महाकाल, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
महाकाल की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भय-मृत्यु से छूटे, शिव-कृपा पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से महाकाल की यह आरती गाता है, वह भय व मृत्यु-भय से छूट जाता है और शिव-कृपा प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे महाकाल भगवान, हे अवंतिका (उज्जैन) के नाथ, आपकी जय हो! भस्म रमे शरीर पर शोभा देती है तथा हाथों में त्रिशूल व डमरू सुशोभित हैं।
- दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग रूप में आप उज्जैन में सुशोभित हैं; आप काल के भी काल हैं, इसी से "महाकाल" रूप में विराजमान हैं।
- प्रातः की भस्म आरती समस्त जगत में अति प्रिय है; आपके दर्शन से भक्तों के भारी दुःख मिट जाते हैं।
- अकाल मृत्यु से रक्षा कीजिए, हमारे भय-संकट दूर कीजिए; हे महाकाल, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
- जो भक्त श्रद्धा से महाकाल की यह आरती गाता है, वह भय व मृत्यु-भय से छूट जाता है और शिव-कृपा प्राप्त करता है।
लाभ
- अकाल मृत्यु व मृत्यु-भय से रक्षा होती है।
- रोग, संकट व नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
- मन को शांति, निर्भयता व शिव-कृपा प्राप्त होती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
महाकालेश्वर (शिवलिंग) पर जल, बेलपत्र व भस्म अर्पित करें, "ॐ नमः शिवाय" व "जय महाकाल" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। श्रावण व महाशिवरात्रि पर विशेष फलदायी।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
श्री शिव
Lord Shiva
महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।
