FAQ
महाशिवरात्रि — सामान्य प्रश्न
महाशिवरात्रि चतुर्दशी तिथि, कृष्ण पक्ष, फाल्गुन को मनाया जाता है। सटीक तिथि हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदलती है — इसी संग्रह का पंचांग पृष्ठ देखें।
महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व है, जो फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है (अमांत गणना में माघ कृष्ण चतुर्दशी) — प्रायः फरवरी-मार्च में।
महाशिवरात्रि मुख्यतः श्री शिव की आराधना का पर्व माना जाता है। इसी पृष्ठ पर उनसे जुड़े आरती, चालीसा व मंत्र भी दिए गए हैं।
परंपरा में इस दिन दिनभर उपवास तथा रात्रि जागरण (इस व्रत का प्रमुख अंग), चारों प्रहर शिव पूजन — प्रथम में जल, द्वितीय में दूध-दही, तृतीय में घी-शहद, चतुर्थ में गंगाजल व फल, शिवलिंग का रुद्राभिषेक तथा बेलपत्र, धतूरा, आक व भस्म का अर्पण, निशीथ काल (मध्यरात्रि) में विशेष पूजन — सर्वाधिक फलदायी प्रहर का विधान बताया जाता है। ये परंपरागत मान्यताएँ हैं; क्षेत्र और परिवार के अनुसार विधि में अंतर मिलता है।
हाँ। महाशिवरात्रि से जुड़ी व्रत कथा इसी संग्रह में उपलब्ध है और इस पृष्ठ से जुड़ी हुई है। कथा हिन्दी, IAST व रोमन तीनों लिपियों में पढ़ी जा सकती है।
अनुशंसित पाठ
महाशिवरात्रि के लिए अनुशंसित आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र
आराध्य देव
