महाशिवरात्रि

Maha Shivratri

फरवरी–मार्च

महत्व

महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व है, जो फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है (अमांत गणना में माघ कृष्ण चतुर्दशी) — प्रायः फरवरी-मार्च में।

प्रत्येक मास की कृष्ण चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि होती है, किंतु फाल्गुन की यह चतुर्दशी "महा" शिवरात्रि कहलाती है। परंपरा में इसके तीन कारण बताए जाते हैं — मान्यता है कि इसी रात्रि भगवान शिव व माता पार्वती का विवाह हुआ; इसी तिथि को भगवान सदाशिव अपने अनादि-अनंत शिवलिंग स्वरूप में प्रकट हुए, जिसे "लिंगोद्भव" कहा जाता है; तथा इसी रात्रि शिव ने तांडव नृत्य किया।

इस व्रत की सबसे बड़ी विशेषता है रात्रि जागरण तथा चारों प्रहर का पूजन। शिवरात्रि दिन का नहीं, रात्रि का व्रत है — इसीलिए इसका नाम ही "शिव-रात्रि" है, और इसमें निशीथ काल (मध्यरात्रि) का पूजन सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस रात्रि जागकर चारों प्रहर शिव का पूजन करने वाला भक्त जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त होता है।

पूजन विधि व परंपरा

  • दिनभर उपवास तथा रात्रि जागरण (इस व्रत का प्रमुख अंग)
  • चारों प्रहर शिव पूजन — प्रथम में जल, द्वितीय में दूध-दही, तृतीय में घी-शहद, चतुर्थ में गंगाजल व फल
  • शिवलिंग का रुद्राभिषेक तथा बेलपत्र, धतूरा, आक व भस्म का अर्पण
  • निशीथ काल (मध्यरात्रि) में विशेष पूजन — सर्वाधिक फलदायी प्रहर
  • शिव तांडव स्तोत्र, लिंगाष्टकम व शिव चालीसा का पाठ
  • महामृत्युंजय मंत्र तथा "ॐ नमः शिवाय" का जप
  • शिव-पार्वती विवाह के उपलक्ष्य में शिव बारात व झाँकी
  • अगले दिन सूर्योदय पश्चात पारण-मुहूर्त में व्रत का पारण

व्रत कथा

महाशिवरात्रि की सम्पूर्ण व्रत कथा, पूजन सामग्री, चरण-दर-चरण विधि, व्रत के नियम तथा लाभ — सब कुछ एक ही पृष्ठ पर दिया गया है।

महाशिवरात्रि व्रत कथा पढ़ें

तिथि / पंचांग

तिथिचतुर्दशी
पक्षकृष्ण
माहफाल्गुन
समय (लगभग)फरवरी–मार्च
आराध्यश्री शिव
मूल परंपराशिव पुराण / ईशान संहिता परंपरा
व्रत प्रकारतिथि व्रत (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी) — रात्रि जागरण सहित
स्रोतhi.wikipedia.org/wiki/महाशिवरात्रि — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी; शिव-पार्वती विवाह तथा अग्निलिंग-उदय की परंपरा; वर्ष की बारह शिवरात्रियों में महाशिवरात्रि प्रमुख
आज का पंचांग

महाशिवरात्रि — सामान्य प्रश्न

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