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जून 2026 — एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रांति व प्रमुख पर्व
हिंदू पंचांग — सम्पूर्ण जानकारी
आज का पंचांग, दैनिक पंचांग और हिंदू पंचांग कैलेंडर की विस्तृत जानकारी
पंचांग क्या है?
पंचांग एक संस्कृत शब्द है जो "पंच" (पाँच) और "अंग" (अंश/भाग) से मिलकर बना है। यह हिंदू वैदिक कैलेंडर प्रणाली है जो पाँच मुख्य खगोलीय-ज्योतिषीय तत्वों का समग्र विवरण देती है।
पंचांग केवल एक कैलेंडर नहीं — यह प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान, गणित और आध्यात्मिकता का संगम है। हजारों वर्षों से भारतीय समाज में शुभ मुहूर्त, व्रत, त्योहार और दैनिक जीवन के निर्णयों के लिए पंचांग का उपयोग होता आया है।
पंचांग के पाँच अंग
वैदिक पंचांग पाँच मुख्य तत्वों से मिलकर बनता है:
तिथि — चंद्र दिन। सूर्य और चंद्रमा के बीच 12° का अंतर एक तिथि बनाता है। एक महीने में 30 तिथियाँ होती हैं — शुक्ल पक्ष में 15 और कृष्ण पक्ष में 15।
नक्षत्र — चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित हो। आकाश को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है, प्रत्येक 13°20 मिनट का।
योग — सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त देशांतर स्थिति से बना। 27 योग होते हैं।
करण — आधी तिथि के बराबर। एक तिथि में दो करण होते हैं। 11 करण हैं — 7 चर और 4 स्थिर।
वार — सप्ताह का दिन। प्रत्येक वार का एक स्वामी ग्रह होता है जो उस दिन के गुण निर्धारित करता है।
तिथि का महत्व
तिथि वैदिक पंचांग का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह चंद्रमा की गति से निर्धारित होती है और जन्म, विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ अवसरों में मुहूर्त निकालने के लिए सर्वाधिक उपयोगी है।
प्रत्येक तिथि का एक देवता, एक प्रकृति (शुभ/मिश्र/अशुभ) और विशेष धार्मिक महत्व होता है। एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और चतुर्थी विशेष रूप से महत्वपूर्ण तिथियाँ हैं जिन पर विशेष व्रत और पूजा की जाती है।
नक्षत्र का महत्व
नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति को दर्शाता है। 27 नक्षत्रों में से जिसमें चंद्रमा जन्म के समय हो, वह जन्म नक्षत्र कहलाता है।
आज का नक्षत्र (दैनिक नक्षत्र) दिन की ऊर्जा, उपयुक्त गतिविधियों और भावनात्मक प्रवृत्तियों को प्रभावित करता है। पंचांग में नक्षत्र का उपयोग विवाह मुहूर्त (नक्षत्र मिलान), नामकरण और दैनिक कार्यों के लिए होता है।
योग और करण का महत्व
योग सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति से बनता है। 27 योगों में से कुछ शुभ (जैसे सिद्धि, शुभ, ब्रह्म) और कुछ अशुभ (जैसे विष्कम्भ, शूल, वैधृति) होते हैं।
करण तिथि का आधा भाग है और विशेष कार्यों की शुभता-अशुभता को बताता है। 'भद्रा' (विष्टि) करण में महत्वपूर्ण कार्य टाले जाते हैं। वणिज करण व्यापार के लिए, बालव और कौलव शुभ कार्यों के लिए उत्तम माने जाते हैं।
पंचांग का उपयोग कैसे करें
पंचांग का सही उपयोग दैनिक जीवन में लाभकारी सिद्ध होता है:
मुहूर्त निकालना — विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ या यात्रा के लिए शुभ तिथि और समय जानने के लिए पंचांग का उपयोग करें।
व्रत-पर्व — एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा और अमावस्या के लिए तिथि जानें।
राहुकाल से बचाव — दिन के अशुभ काल में नए कार्य शुरू न करें।
शुभ समय — ब्रह्म मुहूर्त में साधना और अभिजीत मुहूर्त में महत्वपूर्ण कार्य करें।
दैनिक मार्गदर्शन — तिथि और नक्षत्र की प्रकृति के अनुसार दिन की योजना बनाएं।
आज का पंचांग — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आपके लिए उपयोगी पंचांग टूल्स
दैनिक पंचांग, मुहूर्त और वैदिक समय गणना से जुड़े अन्य उपयोगी टूल्स
राहु काल
आज का राहुकाल समय जानें और इस अशुभ काल में नए कार्यों से बचें।
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दिन और रात के चौघड़िया मुहूर्त देखें और शुभ समय चुनें।
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दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल — महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उत्तम समय।
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त्योहार कैलेंडर
हिंदू व्रत, एकादशी, पूर्णिमा और प्रमुख त्योहारों का कैलेंडर।
आज का पंचांग
आज का सम्पूर्ण पंचांग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और मुहूर्त।
