शिव गायत्री मंत्र

śiva gāyatrī mantra

Shiva Gayatri Mantra

समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
सोमवार व प्रदोष
उद्देश्य:शांति (Peace)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)रक्षा (Protection)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र

शिव गायत्री मंत्र — पारंपरिक शिव गायत्री (गायत्री छंद)। हम उस तत्पुरुष (परम पुरुष) को जानते हैं और महादेव का ध्यान करते हैं; वे रुद्र हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। परंपरा में इसे मुख्यतः शांति, आध्यात्मिक उन्नति, रक्षा के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: पारंपरिक शिव गायत्री (गायत्री छंद)

एक नज़र में

मंत्र / पाठशिव गायत्री मंत्र
IASTśiva gāyatrī mantra
प्रकारगायत्री मंत्र
देवताश्री शिव
मूल स्रोतपारंपरिक शिव गायत्री (गायत्री छंद)
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनसोमवार व प्रदोष
पाठ समय40 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

शिव गायत्री मंत्र पारंपरिक शिव गायत्री (गायत्री छंद) के रूप में जाना जाता है। हम उस तत्पुरुष (परम पुरुष) को जानते हैं और महादेव का ध्यान करते हैं; वे रुद्र हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: तत्पुरुषाय — उस परम पुरुष को; विद्महे — हम जानते हैं; महादेवाय — महादेव को; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् — वे रुद्र हमारी बुद्धि को प्रेरित करें। इन्हीं पदों के मेल से पूरे मंत्र का भाव बनता है, इसलिए जप करते समय इनका स्मरण रखना उपयोगी कहा जाता है।

यह गायत्री छंद में रचा मंत्र है। गायत्री-वर्ग के मंत्रों में स्वर तथा छंद का विशेष विधान होता है, इसलिए परंपरा में इन्हें शुद्ध उच्चारण सहित सीखने पर बल दिया जाता है।

परंपरा में इसका जप 108 बार — एक माला — कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष माला बताई जाती है। इसके लिए सोमवार व प्रदोष विशेष कहे जाते हैं। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि संख्या से अधिक महत्व नियमितता का है।

मंत्र

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ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

उच्चारण (Pronunciation)

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

oṃ tatpuruṣāya vidmahe mahādevāya dhīmahi | tanno rudraḥ pracodayāt ||

Om Tatpurushaya Vidmahe Mahadevaya Dhimahi, Tanno Rudrah Prachodayat.

उच्चारण मार्गदर्शन: "तत्-पुरुषाय", "विद्-म-हे", "महा-देवाय", "धी-म-हि" को स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ है। "प्रचोदयात्" का अंतिम "त्" हल्का हलन्त उच्चारित करें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

तत्पुरुषायउस परम पुरुष को
विद्महेहम जानते हैं
महादेवायमहादेव को
धीमहिहम ध्यान करते हैं
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्वे रुद्र हमारी बुद्धि को प्रेरित करें

अर्थ (हिन्दी)

  1. हम उस तत्पुरुष (परम पुरुष) को जानते हैं और महादेव का ध्यान करते हैं; वे रुद्र हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

लाभ

  • मन को गहन शांति व स्थिरता मिलती है।
  • भय व नकारात्मकता से रक्षा होती है।
  • भक्ति व आध्यात्मिक उन्नति होती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: प्रातः, संध्या व सोमवार

जप का उत्तम समय

प्रातः व संध्यासोमवार व प्रदोष काल मेंमहाशिवरात्रि पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शिवलिंग के समक्ष जल व बेलपत्र अर्पित कर रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। सोमवार व प्रदोष काल में जप विशेष फलदायी होता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — शिव मंत्र (vedic-mantra सूची) · blog.shlokmantra.com — 108 देवताओं के गायत्री मंत्र · hindi.webdunia.com — हर देवी-देवता का गायत्री मंत्र
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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