समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
सोमवार व प्रदोष
उद्देश्य:शांति (Peace)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)रक्षा (Protection)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र
शिव गायत्री मंत्र — पारंपरिक शिव गायत्री (गायत्री छंद)। हम उस तत्पुरुष (परम पुरुष) को जानते हैं और महादेव का ध्यान करते हैं; वे रुद्र हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। परंपरा में इसे मुख्यतः शांति, आध्यात्मिक उन्नति, रक्षा के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
शिव गायत्री मंत्र — सामान्य प्रश्न
यह मन को शांति देता है, भय से रक्षा करता है और भक्ति व आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है।
प्रातः-संध्या, सोमवार, प्रदोष काल व महाशिवरात्रि पर इसका जप विशेष लाभकारी माना जाता है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः, संध्या व सोमवार है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — तत्पुरुषाय — उस परम पुरुष को; विद्महे — हम जानते हैं; महादेवाय — महादेव को; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् — वे रुद्र हमारी बुद्धि को प्रेरित करें। पूरे मंत्र का भाव यह है: हम उस तत्पुरुष (परम पुरुष) को जानते हैं और महादेव का ध्यान करते हैं; वे रुद्र हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
यह गायत्री मंत्र है, जिसमें स्वर तथा छंद का भी विधान होता है। परंपरा में ऐसे मंत्रों को गुरु के मुख से शुद्ध उच्चारण सहित सीखना श्रेष्ठ कहा जाता है। श्रद्धापूर्वक श्रवण तथा भावपूर्ण पाठ पर रोक नहीं बताई जाती।
"तत्-पुरुषाय", "विद्-म-हे", "महा-देवाय", "धी-म-हि" को स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ है। "प्रचोदयात्" का अंतिम "त्" हल्का हलन्त उच्चारित करें। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
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