करवा चौथ व्रत कथा

Karwa Chauth Vrat Katha

विशेष व्रत (निर्जला)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

करवा चौथ सुहागिन स्त्रियों का प्रमुख व्रत है, जो कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को रखा जाता है। पत्नियाँ पति की दीर्घायु व सुख-समृद्धि हेतु निर्जला (बिना जल) व्रत रखती हैं और रात्रि में चंद्र दर्शन कर व्रत खोलती हैं।

इस व्रत में शिव-पार्वती, गणेश व करवा माता का पूजन होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देकर छलनी से पति का मुख देखने की परंपरा प्रचलित है।

व्रत नियम (Fasting Guide)

कौन रखेसुहागिन स्त्रियाँ (कुछ कुँवारी कन्याएँ भी मनोकामना हेतु)
कब रखेंकार्तिक कृष्ण चतुर्थी; सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला
आहार नियम:
  • पूरे दिन निर्जल व्रत (जल व अन्न दोनों वर्जित)
  • प्रातः सरगी (सास द्वारा दिया भोजन) ग्रहण
  • चंद्र दर्शन व अर्घ्य के बाद व्रत खोलना
अनुशंसित अभ्यास:
  • शिव-पार्वती व गणेश पूजन
  • करवा चौथ कथा श्रवण
  • चंद्रमा को अर्घ्य व पति का आशीर्वाद

पूजन सामग्री

करवा (मिट्टी/धातु का पात्र)छलनीदीपकसींक व करवा माता चित्रमिठाई व फलसिंदूर, मेहंदी, श्रृंगार सामग्री

पूजन विधि (चरण-दर-चरण)

  1. प्रातः सरगी ग्रहण कर निर्जला व्रत का संकल्प लें।
  2. संध्या को शिव-पार्वती, गणेश व करवा माता की पूजा करें।
  3. अन्य सुहागिनों के साथ बैठकर करवा चौथ कथा सुनें व करवा फेरें।
  4. रात्रि चंद्रोदय पर छलनी से चंद्रमा व फिर पति का मुख देखें, अर्घ्य दें।
  5. पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलें व आशीर्वाद लें।

व्रत कथा

वीरावती और उसके सात भाइयों की कथा

इन्द्रप्रस्थपुर में वेदशर्मा नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनके सात पुत्र और वीरावती नाम की एक पुत्री थी — सात भाइयों की इकलौती, सबकी लाड़ली बहन। विवाह के बाद जब वीरावती मायके में थी, तब उसने भाभियों के साथ पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा, पर भूख सह न सकी और मूर्छित हो गई।

बहन का कष्ट भाइयों से देखा न गया। एक भाई दूर वट के पेड़ पर छलनी और दीपक लेकर चढ़ गया, और बाक़ी भाइयों ने वीरावती से कहा कि चंद्रमा निकल आया है। छलनी के पीछे दीपक को चंद्रमा समझकर वीरावती ने अर्घ्य दिया और व्रत खोल लिया। भोजन करते ही अशुभ संकेत मिलने लगे, और ससुराल पहुँचकर उसने अपने पति को मृत पाया।

वीरावती के विलाप पर देवी इन्द्राणी आईं और बताया कि चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत तोड़ने से यह हुआ। उन्होंने करवा चौथ के साथ पूरे वर्ष हर महीने की चौथ का व्रत करने को कहा। वीरावती ने पूरी श्रद्धा से सब व्रत किए, और उनके पुण्य से उसे अपना पति फिर प्राप्त हुआ।

लाभ

  • पति की दीर्घायु व आरोग्य।
  • दांपत्य जीवन में सुख व प्रेम।
  • परिवार में मंगल व सौभाग्य।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपरापारंपरिक लोक-परंपरा
स्रोतdrikpanchang.com — करवा चौथ व्रत कथा (वीरावती एवं उसके सात भाईयों की कथा) · bhaktvatsal.com — करवा और उसके सात भाइयों की कहानी
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है; क्षेत्रीय परंपरा अनुसार विधि भिन्न हो सकती है — विस्तृत हेतु बड़ों/पुरोहित से परामर्श लें।

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारविशेष व्रत (निर्जला)
आराध्यश्री शिव
आज का पंचांग

करवा चौथ व्रत कथा — सामान्य प्रश्न