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FAQ
करवा चौथ व्रत कथा — सामान्य प्रश्न
यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है, जो प्रायः अक्टूबर–नवंबर में पड़ता है। सटीक तिथि प्रतिवर्ष पंचांग के अनुसार बदलती है।
इस व्रत में शिव-पार्वती, भगवान गणेश तथा करवा माता का पूजन किया जाता है। पूजन के पश्चात रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
चंद्रोदय पर स्त्रियाँ छलनी से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का मुख देखती हैं, तत्पश्चात पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं। यह परंपरा व्यापक रूप से प्रचलित है।
रात्रि चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर, छलनी से चंद्र व पति का मुख देखकर, पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला जाता है।
हाँ, कुछ परंपराओं में कुँवारी कन्याएँ भविष्य में अच्छे वर की कामना से (प्रायः बिना निर्जल नियम के) यह व्रत रखती हैं।
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