करवा चौथ व्रत कथा
पाठ
व्रत नियम
कौन रखे: सुहागिन स्त्रियाँ (कुछ कुँवारी कन्याएँ भी मनोकामना हेतु)
कब: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी; सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला
आहार नियम: पूरे दिन निर्जल व्रत (जल व अन्न दोनों वर्जित); प्रातः सरगी (सास द्वारा दिया भोजन) ग्रहण; चंद्र दर्शन व अर्घ्य के बाद व्रत खोलना
पूजन सामग्री
करवा (मिट्टी/धातु का पात्र) · छलनी · दीपक · सींक व करवा माता चित्र · मिठाई व फल · सिंदूर, मेहंदी, श्रृंगार सामग्री
पूजन विधि
- प्रातः सरगी ग्रहण कर निर्जला व्रत का संकल्प लें।
- संध्या को शिव-पार्वती, गणेश व करवा माता की पूजा करें।
- अन्य सुहागिनों के साथ बैठकर करवा चौथ कथा सुनें व करवा फेरें।
- रात्रि चंद्रोदय पर छलनी से चंद्रमा व फिर पति का मुख देखें, अर्घ्य दें।
- पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलें व आशीर्वाद लें।
व्रत कथा
वीरावती और उसके सात भाइयों की कथा
इन्द्रप्रस्थपुर में वेदशर्मा नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनके सात पुत्र और वीरावती नाम की एक पुत्री थी — सात भाइयों की इकलौती, सबकी लाड़ली बहन। विवाह के बाद जब वीरावती मायके में थी, तब उसने भाभियों के साथ पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा, पर भूख सह न सकी और मूर्छित हो गई।
बहन का कष्ट भाइयों से देखा न गया। एक भाई दूर वट के पेड़ पर छलनी और दीपक लेकर चढ़ गया, और बाक़ी भाइयों ने वीरावती से कहा कि चंद्रमा निकल आया है। छलनी के पीछे दीपक को चंद्रमा समझकर वीरावती ने अर्घ्य दिया और व्रत खोल लिया। भोजन करते ही अशुभ संकेत मिलने लगे, और ससुराल पहुँचकर उसने अपने पति को मृत पाया।
वीरावती के विलाप पर देवी इन्द्राणी आईं और बताया कि चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत तोड़ने से यह हुआ। उन्होंने करवा चौथ के साथ पूरे वर्ष हर महीने की चौथ का व्रत करने को कहा। वीरावती ने पूरी श्रद्धा से सब व्रत किए, और उनके पुण्य से उसे अपना पति फिर प्राप्त हुआ।
लाभ
- पति की दीर्घायु व आरोग्य।
- दांपत्य जीवन में सुख व प्रेम।
- परिवार में मंगल व सौभाग्य।
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. drikpanchang.com — करवा चौथ व्रत कथा (वीरावती एवं उसके सात भाईयों की कथा) · bhaktvatsal.com — करवा और उसके सात भाइयों की कहानी
