प्रदोष व्रत कथा

Pradosh Vrat Katha

तिथि व्रत (त्रयोदशी — मासिक दो बार)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है और प्रत्येक माह त्रयोदशी तिथि को आता है। "प्रदोष काल" अर्थात् सूर्यास्त के आसपास का समय शिव पूजन हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर आनंदपूर्वक नृत्य करते हैं और इस समय की गई आराधना शीघ्र फलदायी होती है। वार अनुसार प्रदोष का विशेष महत्व है — सोम प्रदोष, भौम प्रदोष, शनि प्रदोष आदि।

व्रत नियम (Fasting Guide)

कौन रखेशिव भक्त स्त्री-पुरुष (स्वास्थ्यानुसार)
कब रखेंप्रत्येक माह की दोनों त्रयोदशी; पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त) में
आहार नियम:
  • दिनभर निराहार या फलाहार
  • प्रदोष पूजन के बाद सात्विक भोजन
  • तामसिक भोजन वर्जित
अनुशंसित अभ्यास:
  • शिवलिंग पर जल-बेलपत्र अर्पण
  • शिव चालीसा व महामृत्युंजय जप
  • प्रदोष काल में आरती

पूजन सामग्री

शिवलिंग/शिव चित्रबेलपत्रगंगाजलधतूरा व सफेद पुष्पदीप व धूपफल

पूजन विधि (चरण-दर-चरण)

  1. त्रयोदशी प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें और दिनभर उपवास रखें।
  2. प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग पूर्व) पुनः स्नान कर शिव पूजन की तैयारी करें।
  3. शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा व पुष्प अर्पित करें।
  4. शिव चालीसा व प्रदोष कथा का पाठ कर "ॐ नमः शिवाय" का जप करें।
  5. आरती कर प्रसाद ग्रहण करें व व्रत का पारण करें।

व्रत कथा

विधवा ब्राह्मणी की कथा

एक नगर में एक निर्धन विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र सहित भिक्षा माँगकर जीवन निर्वाह करती थी। वह नित्य प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करती थी।

एक दिन उसके पुत्र को वन में एक राजकुमारी (गंधर्व कन्या) मिली; शिव की कृपा व प्रदोष व्रत के प्रभाव से उनका विवाह हुआ और ब्राह्मणी का दरिद्रता-कष्ट दूर हो गया।

इस कथा का सार यह है कि प्रदोष व्रत श्रद्धा से करने पर भगवान शिव दरिद्रता, संकट व दुखों का नाश कर सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

लाभ

  • रोग, ऋण व दरिद्रता का नाश।
  • मनोकामना पूर्ति व शिव कृपा।
  • मन की शांति व निर्भयता।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपरास्कंद पुराण / शिव पुराण
स्रोतशिव पुराण / स्कंद पुराण
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है; विस्तृत विधि हेतु किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (त्रयोदशी — मासिक दो बार)
संबंधित पर्वप्रदोष व्रत
तिथित्रयोदशी
आराध्यश्री शिव
आज का पंचांग प्रदोष व्रत विवरण

प्रदोष व्रत कथा — सामान्य प्रश्न