प्रदोष व्रत कथा
पाठ
व्रत नियम
कौन रखे: शिव भक्त स्त्री-पुरुष (स्वास्थ्यानुसार)
कब: प्रत्येक माह की दोनों त्रयोदशी; पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त) में
आहार नियम: दिनभर निराहार या फलाहार; प्रदोष पूजन के बाद सात्विक भोजन; तामसिक भोजन वर्जित
पूजन सामग्री
शिवलिंग/शिव चित्र · बेलपत्र · गंगाजल · धतूरा व सफेद पुष्प · दीप व धूप · फल
पूजन विधि
- त्रयोदशी प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें और दिनभर उपवास रखें।
- प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग पूर्व) पुनः स्नान कर शिव पूजन की तैयारी करें।
- शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा व पुष्प अर्पित करें।
- शिव चालीसा व प्रदोष कथा का पाठ कर "ॐ नमः शिवाय" का जप करें।
- आरती कर प्रसाद ग्रहण करें व व्रत का पारण करें।
व्रत कथा
विधवा ब्राह्मणी की कथा
एक नगर में एक निर्धन विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र सहित भिक्षा माँगकर जीवन निर्वाह करती थी। वह नित्य प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करती थी।
एक दिन उसके पुत्र को वन में एक राजकुमारी (गंधर्व कन्या) मिली; शिव की कृपा व प्रदोष व्रत के प्रभाव से उनका विवाह हुआ और ब्राह्मणी का दरिद्रता-कष्ट दूर हो गया।
इस कथा का सार यह है कि प्रदोष व्रत श्रद्धा से करने पर भगवान शिव दरिद्रता, संकट व दुखों का नाश कर सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
लाभ
- रोग, ऋण व दरिद्रता का नाश।
- मनोकामना पूर्ति व शिव कृपा।
- मन की शांति व निर्भयता।
स्रोत
रचयिता: शिव पुराण परंपरा. शिव पुराण / स्कंद पुराण
