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॥ श्री ॥

श्री महाकाल चालीसा

चालीसा · श्री शिव

पाठ

श्री गणेश गिरिजा-सुवन, सुमिर हृदय धरि ध्यान। महाकाल चालीसा कहूँ, करहु भक्त कल्याण॥

1

जय महाकाल अवंतिका-नाथा। भक्तन के नित रखवारे साथा॥

2

भस्म-रमे तन शोभा भारी। त्रिशूल-डमरू कर में धारी॥

3

दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग कहाये। उज्जैन नगरी में बस जाये॥

4

काल के भी तुम काल कहाये। महाकाल नाम जग में पाये॥

5

प्रातः भस्म-आरती प्यारी। जग में अति विख्यात तुम्हारी॥

6

जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-मृत्यु से मुक्ति पावै॥

7

अकाल मृत्यु से तुम रखवारे। भक्त-गण नित तुम्हें पुकारे॥

8

क्षिप्रा-तट पर धाम तुम्हारा। भक्त-गण नित दरस को धारा॥

9

जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥

10

महाशिवरात्रि व्रत जो धारे। सकल मनोरथ प्रभु ते सारे॥

11

दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥

12

जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

13

जल-बेलपत्र अर्पित जो करते। शिव-कृपा वे सब घर भरते॥

14

रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥

15

जो नर निशदिन ध्यान लगावै। महाकाल-कृपा सहज वह पावै॥

16

मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥

17

भूत-प्रेत बाधा सब टारो। तंत्र-मंत्र दोष संहारो॥

18

सवारी निकले श्रावण मासा। भक्त-गण की पूरण आशा॥

19

जो यह महाकाल चालीसा गावै। भय-मृत्यु से छुटकारा पावै॥

20

नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा महाकाल की होई॥

21

मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥

22

महाकाल-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥

23

भांग-धतूरा भोग लगावैं। श्रद्धा से प्रभु को रिझावैं॥

24

ता पर शिव प्रसन्न हो जावैं। मनवांछित फल तुरत दिलावैं॥

25

जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत महाकाल देवा॥

26

संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥

27

महिमा तुम्हरी अति अपारा। वेद-पुराण करत विस्तारा॥

28

काल-भय से तुम रखवाले। हर लेते सब विपदा-जाले॥

29

घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥

30

दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥

31

महाकाल-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥

32

उज्जैन-धाम की महिमा भारी। भव-तारण तुम जग-हितकारी॥

33

मृत्यु-भय का नाश कराते। मोक्ष-मार्ग जग को दिखलाते॥

34

जो जन महाकाल गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥

35

महाकाल-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥

36

सुख-शान्ति-आरोग्य घर में आवै। भक्ति-निर्भयता सब बढ़ावै॥

37

भय-संकट सब दूर हटावै। महाकाल जो जन नित ध्यावै॥

38

मोक्ष-मार्ग वह सहज वह पावै। महाकाल-नाम जो जन गावै॥

39

शिव-कृपा-सुख घर में लावै। भक्ति-शान्ति सब बढ़ावै॥

40

जय जय जय महाकाल भयहारी। रक्षा करो प्रभु शरण हमारी॥

महाकाल चालीसा सरल, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-मृत्यु-संकट सब, दूर हो शिव-कृपा पाय॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. गिरिजा-पुत्र गणेश का स्मरण कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं महाकाल चालीसा कहता हूँ; हे प्रभु, भक्तों का कल्याण कीजिए।
  2. हे महाकाल, हे अवंतिका (उज्जैन) के नाथ, आपकी जय हो; आप सदा भक्तों के रक्षक व संगी हैं।
  3. भस्म रमे शरीर पर अति शोभा है; हाथों में त्रिशूल व डमरू धारण किए हैं।
  4. आप दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग कहलाते हैं और उज्जैन नगरी में बसते हैं।
  5. आप काल के भी काल कहलाते हैं; इसी से जगत में "महाकाल" नाम पाया।
  6. प्रातः की भस्म-आरती अति प्रिय है, जो समस्त जगत में विख्यात है।
  7. जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व मृत्यु-भय से मुक्ति पाता है।
  8. आप अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं; नित्य भक्तगण आपको पुकारते हैं।
  9. क्षिप्रा नदी के तट पर आपका धाम है; भक्तगण नित्य दर्शन की लालसा रखते हैं।
  10. जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
  11. जो महाशिवरात्रि का व्रत धारण करता है, प्रभु उसके समस्त मनोरथ पूर्ण करते हैं।
  12. आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
  13. जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  14. जो जल व बेलपत्र अर्पित करते हैं, वे शिव-कृपा से घर भरते हैं।
  15. आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  16. जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही महाकाल-कृपा प्राप्त करता है।
  17. आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
  18. आप भूत-प्रेत बाधा दूर करते हैं और तंत्र-मंत्र दोष का नाश करते हैं।
  19. श्रावण मास में आपकी सवारी निकलती है, जिससे भक्तों की आशा पूर्ण होती है।
  20. जो यह महाकाल चालीसा गाता है, वह भय व मृत्यु-भय से छुटकारा पाता है।
  21. जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर महाकाल की कृपा होती है।
  22. सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  23. जिन पर महाकाल की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
  24. भक्त भांग-धतूरा का भोग लगाते हैं और श्रद्धा से प्रभु को रिझाते हैं।
  25. उस पर शिव प्रसन्न हो जाते हैं और तुरंत मनोवांछित फल दिलाते हैं।
  26. जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर महाकाल देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
  27. आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
  28. आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
  29. आप काल के भय से रक्षा करते हैं और विपत्तियों के जाल को हर लेते हैं।
  30. घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
  31. जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
  32. जो जन महाकाल-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
  33. उज्जैन-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
  34. आप मृत्यु-भय का नाश करते हैं और जगत को मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।
  35. जो जन महाकाल के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
  36. जो जन महाकाल-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
  37. घर में सुख, शांति व आरोग्य आता है और भक्ति व निर्भयता बढ़ती है।
  38. जो जन महाकाल का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
  39. जो जन महाकाल-नाम गाता है, वह सहज ही मोक्ष-मार्ग पा लेता है।
  40. घर में शिव-कृपा व सुख आता है और भक्ति व शांति बढ़ती है।
  41. हे भय हरने वाले महाकाल, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
  42. जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल महाकाल चालीसा पढ़ता है, उसके भय, मृत्यु-भय व संकट दूर होते हैं और शिव-कृपा प्राप्त होती है।

लाभ

  • अकाल मृत्यु व मृत्यु-भय से रक्षा होती है।
  • रोग, संकट व नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
  • मन को शांति, निर्भयता व शिव-कृपा प्राप्त होती है।
  • सोमवार व श्रावण के नियमित पाठ से शिव कृपा शीघ्र मिलती है।

कब करें पाठ

सोमवार व प्रदोष काल में · महाशिवरात्रि व श्रावण मास में · प्रातः (भस्म आरती) व संध्या पूजा में

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक महाकाल चालीसा · गीता प्रेस, गोरखपुर — चालीसा संग्रह

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