श्री महाकाल चालीसा
पाठ
श्री महाकाल भगवान की महिमा अपरम्पार, पूरी करते कामना भक्तों की करतार॥
विद्या – बुद्धि – तेज – बल – दूध – पूत – धन – धान, अपने अक्षय कोष से भगवान करो प्रदान॥
जय महाकाल काल के नाशक। जय त्रिलोकपति मोक्ष प्रदायक॥
मृत्युंजय भवबाधा हारी। शत्रुंजय करो विजय हमारी॥
आकाश में तारक लिंगम्। पाताल में हाटकेश्वरम्॥
भूलोक में महाकालेश्वरम्। सत्यम् – शिवम् और सुन्दरम्॥
क्षिप्रा तट ऊखर शिव भूमि। महाकाल वन पावन भूमि॥
आशुतोष भोले भण्डारी। नटराज बाघम्बरधारी॥
सृष्टि को प्रारम्भ कराते। कालचक्र को आप चलाते॥
तीर्थ अवन्ती में हैं बसते। दर्शन करते संकट हरते॥
विष पीकर शिव निर्भय करते। नीलकण्ठ महाकाल कहाते॥
महादेव ये महाकाल हैं। निराकार का रूप धरे हैं॥
ज्योतिर्मय – ईशान अधीश्वर। परम् ब्रह्म हैं महाकालेश्वर॥
आदि सनातन – स्वयं ज्योतिश्वर। महाकाल प्रभु हैं सर्वेश्वर॥
जय महाकाल महेश्वर जय – जय। जय हरसिद्धि महेश्वरी जय – जय॥
शिव के साथ शिवा है शक्ति। भक्तों की है रक्षा करती॥
जय नागेश्वर – सौभाग्येश्वर। जय भोले बाबा सिद्धेश्वर॥
ऋणमुक्तेश्वर – स्वर्ण जालेश्वर। अरुणेश्वर बाबा योगेश्वर॥
पंच – अष्ट – द्वादश लिंगों की। महिमा सबसे न्यारी इनकी॥
श्रीकर गोप को दर्शन दे तारी। नंद बाबा की पीढ़ियाँ सारी॥
भक्त चंद्रसेन राजा शरण आए। विजयी करा रिपु – मित्र बनाये॥
दैत्य दूषण भस्म किए। और भक्तों से महाकाल कहाए॥
दुष्ट दैत्य अंधक जब आया। मातृकाओं से नष्ट कराया॥
जगज्जननी हैं माँ गिरि तनया। श्री भोलेश्वर ने मान बढ़ाया॥
श्री हरि की तर्जनी से हर – हर। क्षिप्रा भी लाए गंगाधर॥
अमृतमय पावन जल पाया। ‘ऋषि’ देवों ने पुण्य बढ़ाया॥
नमः शिवाय मंत्र पंचाक्षरी। इनका मंत्र बड़ा भयहारी॥
जिसके जप से मिटती सारी। चिंता – क्लेश – विपद् संसारी॥
सिर जटा – जूट – तन भस्म सजै। डम – डम – डमरू त्रिशूल सजै॥
शमशान विहारी भूतपति। विषधर धारी जय उमापति॥
रुद्राक्ष विभूषित शिवशंकर। त्रिपुण्ड विभूषित प्रलयंकर॥
सर्वशक्तिमान – सर्व गुणाधार। सर्वज्ञ – सर्वोपरि – जगदीश्वर॥
अनादि – अनंत – नित्य – निर्विकारी। महाकाल प्रभु – रूद्र – अवतारी॥
धाता – विधाता – अज – अविनाशी। मृत्यु रक्षक सुखराशी॥
त्रिदल – त्रिनेत्र – त्रिपुण्ड – त्रिशूलधर। त्रिकाय – त्रिलोकपति महाकालेश्वर॥
त्रिदेव – त्रयी हैं एकेश्वर। निराकार शिव योगीश्वर॥
एकादश – प्राण – अपान – व्यान। उदान – नाग – कुर्म – कृकल समान॥
देवदत्त धनंजय रहें प्रसन्न। मन हो उज्जवल जब करें ध्यान॥
अघोर – आशुतोष – जय औढरदानी। अभिषेक प्रिय श्री विश्वेश्वर ध्यानी॥
कल्याणमय – आनंद स्वरुप शशि शेखर। श्री भोलेशंकर जय महाकालेश्वर॥
प्रथम पूज्य श्री गणेश हैं, ऋद्धि – सिद्धि संग। देवों के सेनापति, महावीर स्कंध॥
अन्नपूर्णा माँ पार्वती, जग को देती अन्न। महाकाल वन में बसे, महाकाल के संग॥
शिव कहें जग राम हैं, राम कहें जग शिव। धन्य – धन्य माँ शारदा, ऐसी ही दो प्रीत॥
श्री महाकाल चालीसा, प्रेम से, नित्य करे जो पाठ। कृपा मिले महाकाल की, सिद्ध होय सब काज॥
अर्थ (हिन्दी)
- श्री महाकाल भगवान की महिमा अपरम्पार है; वे भक्तों की कामना पूरी करने वाले करतार हैं।
- हे भगवान, अपने अक्षय कोष से हमें विद्या, बुद्धि, तेज, बल, दूध, पुत्र, धन और धान्य प्रदान कीजिए।
- काल का भी नाश करने वाले महाकाल की जय हो; तीनों लोकों के स्वामी और मोक्ष देने वाले की जय हो।
- आप मृत्यु को जीतने वाले और भव की बाधा हरने वाले हैं; शत्रुओं को जीतने वाले हैं — हमें भी विजय दीजिए।
- आकाश में तारक लिंग हैं, पाताल में हाटकेश्वर।
- और भूलोक में महाकालेश्वर — जो सत्यम्, शिवम् और सुन्दरम् हैं।
- क्षिप्रा के तट की यह ऊसर भूमि शिव की भूमि है; महाकाल वन यह पावन भूमि है।
- आप आशुतोष हैं, भोले भण्डारी हैं; नटराज हैं और बाघम्बर धारण करने वाले हैं।
- आप ही सृष्टि का प्रारम्भ कराते हैं और आप ही कालचक्र चलाते हैं।
- आप अवन्ती (उज्जैन) तीर्थ में बसते हैं; जो दर्शन करता है, उसके संकट हर लेते हैं।
- विष पीकर शिव ने सबको निर्भय किया; इसी से वे नीलकण्ठ और महाकाल कहलाए।
- ये महादेव ही महाकाल हैं; निराकार होकर भी उन्होंने रूप धारण किया है।
- वे ज्योतिर्मय हैं, ईशान के अधीश्वर हैं; महाकालेश्वर परम ब्रह्म हैं।
- वे आदि हैं, सनातन हैं, स्वयं ज्योति के स्वामी हैं; महाकाल प्रभु ही सर्वेश्वर हैं।
- महाकाल महेश्वर की जय-जय; हरसिद्धि महेश्वरी की जय-जय।
- शिव के साथ शिवा शक्ति हैं, जो भक्तों की रक्षा करती हैं।
- जय नागेश्वर, जय सौभाग्येश्वर; जय भोले बाबा सिद्धेश्वर।
- जय ऋणमुक्तेश्वर, जय स्वर्ण जालेश्वर; जय अरुणेश्वर, जय बाबा योगेश्वर।
- पाँच, आठ और बारह लिंगों की महिमा है — पर इनकी महिमा सबसे निराली है।
- आपने श्रीकर नाम के गोप को दर्शन देकर तार दिया, और नंद बाबा की सारी पीढ़ियों को भी।
- भक्त राजा चंद्रसेन आपकी शरण में आए; आपने उन्हें विजयी बनाया और शत्रुओं को मित्र कर दिया।
- आपने दैत्य दूषण को भस्म कर दिया, और तभी से भक्तों ने आपको महाकाल कहा।
- जब दुष्ट दैत्य अंधक आया, तो आपने मातृकाओं से उसका नाश करवाया।
- जगत की जननी माँ गिरितनया (पार्वती) हैं; श्री भोलेश्वर ने उनका मान बढ़ाया।
- श्री हरि की तर्जनी से 'हर-हर' करते हुए गंगाधर क्षिप्रा को भी ले आए।
- इससे अमृतमय पावन जल प्राप्त हुआ, और ऋषियों तथा देवताओं का पुण्य बढ़ा।
- "नमः शिवाय" यह पंचाक्षरी मंत्र है; इनका यह मंत्र बड़ा भय हरने वाला है।
- जिसके जप से संसार की सारी चिंता, क्लेश और विपत्ति मिट जाती है।
- सिर पर जटा-जूट है, तन पर भस्म सजी है; डम-डम डमरू और त्रिशूल शोभा देते हैं।
- आप श्मशान में विहार करने वाले भूतपति हैं; विषधर सर्प धारण करने वाले उमापति की जय हो।
- शिवशंकर रुद्राक्ष से विभूषित हैं; प्रलयंकर त्रिपुण्ड से विभूषित हैं।
- आप सर्वशक्तिमान और सब गुणों के आधार हैं; सर्वज्ञ, सर्वोपरि और जगदीश्वर हैं।
- आप अनादि, अनंत, नित्य और निर्विकार हैं; महाकाल प्रभु रुद्र के अवतार हैं।
- आप धाता हैं, विधाता हैं, अजन्मा और अविनाशी हैं; मृत्यु से रक्षा करने वाले और सुख की राशि हैं।
- आप त्रिदल, त्रिनेत्र, त्रिपुण्ड और त्रिशूल धारण करने वाले हैं; त्रिकाय और त्रिलोक के पति महाकालेश्वर हैं।
- तीनों देव और तीनों वेद मिलकर एक ही ईश्वर हैं; निराकार शिव ही योगीश्वर हैं।
- ग्यारह — प्राण, अपान, व्यान, उदान, नाग, कूर्म, कृकल और समान —
- देवदत्त और धनंजय भी प्रसन्न रहें; ध्यान करने पर मन उज्ज्वल हो जाए।
- हे अघोर, हे आशुतोष, हे औढरदानी — आपकी जय हो; अभिषेक-प्रिय श्री विश्वेश्वर का ध्यान करता हूँ।
- आप कल्याणमय और आनंद-स्वरूप शशिशेखर हैं; श्री भोलेशंकर महाकालेश्वर की जय हो।
- प्रथम पूज्य श्री गणेश ऋद्धि-सिद्धि सहित हैं; देवों के सेनापति महावीर स्कंद (कार्तिकेय) हैं।
- माँ पार्वती अन्नपूर्णा रूप में जगत को अन्न देती हैं; वे महाकाल वन में महाकाल के संग बसती हैं।
- शिव कहते हैं कि जगत राम है और राम कहते हैं कि जगत शिव है; हे माँ शारदा, आप धन्य हैं — हमें भी ऐसी ही प्रीत दीजिए।
- जो प्रेम से नित्य श्री महाकाल चालीसा का पाठ करता है, उसे महाकाल की कृपा मिलती है और उसके सब काम सिद्ध होते हैं।
लाभ
- उज्जैन के मंदिरों के नाम क्रम से — हरसिद्धि, नागेश्वर, सिद्धेश्वर, ऋणमुक्तेश्वर, स्वर्ण जालेश्वर, अरुणेश्वर।
- शिव पुराण के अवन्ती-खंड की कथाएँ — श्रीकर गोप, राजा चंद्रसेन, दैत्य दूषण और अंधक (चौपाई 18–22)।
- महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण सोमवार का पाठ।
- चौपाई 35–36 में शरीर के दस प्राणों की सूची — किसी और चालीसा में नहीं।
कब करें पाठ
सोमवार को · प्रदोष व्रत पर · महाशिवरात्रि और श्रावण मास में · उज्जैन दर्शन या पंचक्रोशी यात्रा के समय
स्रोत
रचयिता: अज्ञात (एक प्रकाशक "मुकेश बागड़ा" बताता है — अपुष्ट). ritiriwaz.com — श्री महाकाल चालीसा / श्री महाकालेश्वर चालीसा (आधार-पाठ; चौपाइयाँ 1–40 अंकित) · poojaaarti.com — महाकाल चालीसा · dharmyaatra.in — महाकाल चालीसा (अर्थ सहित) · mysticalpeepalgrove.blogspot.com (2015) — वही पाठ · ⚠️ bhaktivandana.com इसे "मुकेश बागड़ा" की रचना बताता है; यह अपुष्ट है और पाठ में कोई छाप नहीं।
