श्री नवदुर्गा आरती
śrī navadurgā āratī
Navdurga Aarti (Nine Forms of Durga)
परिचय
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
स्रोत: पारंपरिक नवदुर्गा आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
नवदुर्गा — माँ दुर्गा के नौ स्वरूप शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी व सिद्धिदात्री हैं, जिनकी नवरात्रि में क्रमशः पूजा होती है। यह आरती नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की वंदना हेतु गाई जाती है।
आरती (लिरिक्स)
जय जय नवदुर्गा माता, जय जय आदिशक्ति माता। नौ रूपों में विराजे, तू जग की दाता॥
हे नवदुर्गा माता, हे आदिशक्ति, आपकी जय हो! नौ रूपों में विराजमान आप समस्त जगत को देने वाली हैं।
शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा प्यारी। कूष्माण्डा स्कन्दमाता, कात्यायनी न्यारी॥
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, प्यारी चन्द्रघण्टा; कूष्माण्डा, स्कन्दमाता तथा अद्वितीय कात्यायनी — ये आपके रूप हैं।
कालरात्रि महागौरी, सिद्धिदात्री माता। नौ दिन नौ रूप पूजे, भक्त सुख पाता॥
कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री माता; नवरात्रि के नौ दिन नौ रूपों को पूजकर भक्त सुख प्राप्त करता है।
सिंह-वाहिनी शोभे, शस्त्र अनेक धारी। दुष्ट-दलन कर माता, करती जग-रखवारी॥
सिंह पर सवार होकर सुशोभित, अनेक शस्त्र धारण किए; हे माता, दुष्टों का दमन कर आप जगत की रक्षा करती हैं।
नवदुर्गा की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भय-संकट सब मिटते, मनवांछित पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से नवदुर्गा की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह मनोवांछित फल पाता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे नवदुर्गा माता, हे आदिशक्ति, आपकी जय हो! नौ रूपों में विराजमान आप समस्त जगत को देने वाली हैं।
- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, प्यारी चन्द्रघण्टा; कूष्माण्डा, स्कन्दमाता तथा अद्वितीय कात्यायनी — ये आपके रूप हैं।
- कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री माता; नवरात्रि के नौ दिन नौ रूपों को पूजकर भक्त सुख प्राप्त करता है।
- सिंह पर सवार होकर सुशोभित, अनेक शस्त्र धारण किए; हे माता, दुष्टों का दमन कर आप जगत की रक्षा करती हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से नवदुर्गा की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह मनोवांछित फल पाता है।
लाभ
- भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
- नवरात्रि-साधना का पूर्ण फल व मनोकामना-पूर्ति होती है।
- भक्ति, शक्ति व सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
नवरात्रि में देवी के समक्ष लाल चुनरी, पुष्प व दीप अर्पित करें; प्रत्येक दिन उस दिन के स्वरूप का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। अष्टमी-नवमी पर कन्या-पूजन के साथ इसका विशेष महत्व है।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
माँ दुर्गा
Goddess Durga
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
