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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री नवदुर्गा आरती

आरती · माँ दुर्गा

पाठ

1

जय जय नवदुर्गा माता, जय जय आदिशक्ति माता। नौ रूपों में विराजे, तू जग की दाता॥

2

शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा प्यारी। कूष्माण्डा स्कन्दमाता, कात्यायनी न्यारी॥

3

कालरात्रि महागौरी, सिद्धिदात्री माता। नौ दिन नौ रूप पूजे, भक्त सुख पाता॥

4

सिंह-वाहिनी शोभे, शस्त्र अनेक धारी। दुष्ट-दलन कर माता, करती जग-रखवारी॥

5

नवदुर्गा की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भय-संकट सब मिटते, मनवांछित पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे नवदुर्गा माता, हे आदिशक्ति, आपकी जय हो! नौ रूपों में विराजमान आप समस्त जगत को देने वाली हैं।
  2. शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, प्यारी चन्द्रघण्टा; कूष्माण्डा, स्कन्दमाता तथा अद्वितीय कात्यायनी — ये आपके रूप हैं।
  3. कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री माता; नवरात्रि के नौ दिन नौ रूपों को पूजकर भक्त सुख प्राप्त करता है।
  4. सिंह पर सवार होकर सुशोभित, अनेक शस्त्र धारण किए; हे माता, दुष्टों का दमन कर आप जगत की रक्षा करती हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से नवदुर्गा की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह मनोवांछित फल पाता है।

लाभ

  • भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • नवरात्रि-साधना का पूर्ण फल व मनोकामना-पूर्ति होती है।
  • भक्ति, शक्ति व सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।

कब करें पाठ

नवरात्रि के नौ दिनों में · अष्टमी व नवमी को · प्रातः व संध्या पूजा में

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह

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